कैसा लग रहा है जब आपको दूसरी बार मासी बनने का सौभाग्य मिला है?- यह तो अच्छा ही लग रहा है। नया बच्चा ‘कियान’ वाकई बहुत ही ख़ूबसूरत है। सामरिया बहुत कुछ संजय कपूर पर लगती है परन्तु यह नया बच्चा बहुत कुछ करिश्मा पर गया है। यह हमारे परिवार के लिए एक उत्सव मनाने का समय आया है क्योंकि बहुत दिनों बाद इस परिवार में लड़के का आगमन हुआ है।
आपकी फिल्म 3 ईडियट ने सफलता के सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं और आपने आमिर के साथ अपनी फिल्मी ज़मीन मजबूत कर ली है, कैसा लग रहा है आपको?
-मैं समझती हूँ कि यह सब इसलिए भी हुआ है क्योंकि यह राजू हिरानी की फिल्म थी तथा मैं और आमिर पहली बार साथ में आ रहे थे इसलिए लोगों को फिल्म से बहुत उम्मीद भी थी। मैं समझती हूँ कि हमारी जोड़ी को लोगों ने पसंद भी किया।
क्या आपने इस फिल्म को राजू और आमिर के होने के कारण किया?
-मेरी हर फिल्म में चाहे वो अच्छी हो या बुरी हो, मैंने दूसरे कलाकारों के सामने अपनी मौजूदगी को बनाए रखी है। मेरा ‘ एजन्ट विनोद ’ व ‘ गोलमाल 3 ’ में भी जबरदस्त रोल है। मैं अपनी हर फिल्म में बहुत मेहनत करती हूँ क्योंकि मैं अपने आपको एक स्टार के पहले एक अच्छे कलाकार के रूप में पेश करना चाहती हूँ। मुझे यह अच्छा नहीं लगता कि कोई मुझसे कहे कि मैं अपनी फिल्म में अच्छी लग रही थी क्योंकि मैं जानती हूं कि कोई भी मुझे अपनी खूबसूरती के लिए नहीं अपने टेलेंट के लिए अपनी फिल्म में लेता है। मैं यहां अपना टेलेंट दिखाने के लिए हूं न की अपनी खूबसूरती और इसी कारण से मुझे लडकों की प्रमुखता वाली फिल्म 3 ईडियट में भी लिया गया। मुझे लगता है कि मेरा दर्शक वर्ग मुझे ‘ कम्बक्त इश्क ’ जैसी फिल्मों में देखना पसंद नहीं करता है और यह गलती मैं दोबारा दोहराना नहीं चाहती।
फिल्म ‘कुर्बान’ का रिव्यू अच्छा है फिर आपने उसमें काम क्यों नहीं किया?
- जरूरी नहीं कि मैं हर फिल्म करूँ। जो वक्त के अनुसार सही लगे वही करना चाहिए। एक एक्टर को एक एक्टर की तरह रहना चाहिए। ऐसा नहीं कि दो सुपरहिट देने के बाद कलाकार सुपर स्टार बन जाता है उसे अपनी फ्लाप फिल्मों का भी ध्यान रखना चाहिए क्योंकि दर्शकों कह निगाह में वह महत्वपूर्ण होता है।
आपकी फिल्म साइन करने के लिए एक लंबे प्रोसेस से गुजरना पड़ता है?
- कई बार ऐसा होता है और कई बार नहीं भी। हम एक्टर एक वैज्ञानिक की तरह होते है जो अलग-अलग प्रयोग करता रहता है। लोग जानते है कि करीना रिस्क ले सकती है और मैंने ‘चमेली’ जैसी फिल्म करना स्वीकार किया। मैं इस बात की परवाह नहीं करती कि लोग टशन के बारे में क्या कहते है। मैंने फिल्म में अपना किरदार को जीवंत करने के लिए अपनी बॉडी लेंगवेज को हर तरह से चेंज किया। कितनी एक्ट्रेसेस हैं जो इस प्रकार की चुनौती को स्वीकार कर पाती है वो भी इस पुरूष प्रधान इंडस्ट्री में। टशन मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है क्योंकि उसी दौरान मैं सैफ से मिली थी। कभी-कभी फ्लाप फिल्म भी एक्टर के लिए एक बडी न्यूज बन जाती है।
आप सभी खान कलाकारों में चुनने में क्या ध्यान करती हैं?
- मैंने अपने निजी जीवन के लिए सबसे सेफेस्ट खान का चुनाव कर लिया है। बाकी सभी खानों में सभी एक दूसरे से अलग लगते हैं। सैफ और मैं एक दूसरे के करीबी दोस्त हैं और आमिर और शाहरूख हमारे परिवार जैसे हैं। मेरी बहन सलमान को पसंद करती है।
पर सबमें हो रही प्रतिस्पर्धा जग जाहिर है?
- यहां केवल बीकाऊ 3 या 4 है तो यह प्रतिस्पर्धा तो होनी ही है लोगों के पास कोई चाइस भी तो नहीं है।
आज कल फिल्म इंडस्ट्री में आपको सबसे महंगी एक्ट्रेस के रूप में आंका जा रहा है?
- मैं नहीं जानती । पर आप बताइये हर दिन यह रिपोर्ट आती है कि फलानी एक्ट्रेस इतना लेती है, फलानी इतना। यदि सबसे ज्यादा प्राइज लेने वाली एक्टेªसों की लिस्ट बने तो शायद मेरा उसमें आखरी दस में नाम आयेगा।
आपके और सैफ के संबंधों को लेकर बहुत सारी चर्चाए होती रहती हैं आप उनको किस प्रकार से लेती हैं?
- मेरे व सैफ के संबंध स्पष्ट हैं। हमारे बारे में बहुत कुछ छपता रहता है कि आज हमनें शादी करली, कल तलाक हो गया इन सब गौसिफ का हम मजा भी लेते है। पर हां , जब हम शादी करेंगे तब सारा जमाना जान जाएगा। ये सब कुछ जल्द होने वाला भी है।
आप अपने व्यस्त समय में से परिवार के लिए समय किस प्रकार निकाल पाती हैं?
-मैं बहुत सा समय निकाल लेती हूँ। एक एक्टर के लिए जो लगातार काम कर रहा हो समय निकालना जरूरी है। मैं साल में चार फिल्मों से ज्यादा नहीं करती । मैंने अपने सेक्रेट्री से भी कह रखा है कि हर तीन महीनों के बाद मुझे ब्रेक चाहिए। मैं सारा साल एक साथ काम नहीं कर सकती।
सुना गया था कि आप भी आई पी एल टीम खरीदने वाली थीं?
- हम इसके लिए गये भी थे व पेपर वर्क भी पूरा किया था पर ये सब केंसल हो गया। यदि दोबारा मौका मिला तो यह सब सैफ के समझ का काम है मैं तो केवल फिल्मों के बारे में जानती हूं।
तो क्या आप प्रोडक्शन हाउस खोलने में रूचि रखती है?
- मैं अपने लिए तो फिल्म बनाने से रही। अभी तो बाहर की फिल्मों से ही समय नहीं मिल पा रहा हैं। अभी एक फिल्म मधुर भंडारकर के साथ करने का प्लान चल रहा है। पटकथा लिखी जा रही है पर अभी सब कुछ तय नहीं हुआ है।
‘मिलेंगे-मिलेंगे’ के बारे में रोज सुना जा रहा है पर पता नहीं कब मिलेंगे?
- यह तय हो चुका है कि फिल्म जल्द रिलीज होने जा रही है । मैंनें अपनी ओर से निर्माता बोनी कपूर को कह दिया है कि मैं फिल्म के प्रमोशन के लिए तैयार हूं । बाकी जो कुछ मीडिया में छप रहा है मेरे व ‘ााहिद के बारे में उसके लिए हम आदि हो चुके है।
प्रस्तुतिः अशोक भाटिया

पिछले 6 दशकों से रचनाकर्म में सक्रिय राजेन्द्र यादव साहित्य में महानायक की हैसियत रखते हैं। साल 2006 में वरिष्ठ आलोचक आनंद प्रकाश और युवा कवि-लेखक रामजी यादव की टीम (पीपुल्स विजन प्रोडक्शन कम्पनी) ने राजेन्द्र यादव का लम्बा इंटरव्यू लिया। पीपुल्स विजन यादव जी के समग्र व्यक्तित्व और कृतित्व पर फिल्म बना रहा है। यदि आप भी इस प्रोजेक्ट से किसी भी तरह से जुड़ना चाहें तो रामजी यादव से (yadav.ramji2@gmail.com या 9015634902 पर) संपर्क करें। इस साक्षात्कार में राजेन्द्र यादव ने कविता की विलुप्ति, कहानी-नई कहानी, दलित और महिला लेखन, मार्क्सवाद की भारत में असफलता, साहित्य और राजनीति के पारस्परिक संबंधों इत्यादि पर खुलकर बोला। हमें यह साक्षात्कार संग्रहणीय लगा और यह भी लगा कि शायद हिन्द-युग्म के बहुत-से पाठक भी इसे सुनकर ऐसा महसूस करेंगे कि बहुत कुछ जानने और समझने को मिला।
श्वेता अग्रवाल फिल्म ‘शापित’ से पहले टर्की की एक फिल्म ‘मिरार’ में और ओलिवर पॉलिस की स्विस जर्मन फिल्म ‘तंदूरी लव’ में भी अभिनय कर चुकी हैं। ‘स्टार प्लस’ पर प्रसारित धारावाहिक ‘देखो मगर प्यार से’ में मोटी-सी लडकी के किरदार में नज़र आ चुकीं श्वेता अग्रवाल इन दिनों फिल्म सर्जक विक्रम भट्ट की खोज के रूप में उनकी आगामी फिल्म ‘शॉपित’ में अभिनय करके चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इस फिल्म में उनके हीरो है मे मशहूर संगीतकार उदित नारायण के बेटे आदित्य नारायण हैं। देखा जाए तो यह फिल्म श्वेता के लिए डेब्यू होगी व अपनी बॉलीवुड की पहली ही फिल्म विक्रम भट्ट की हॉरर फिल्म 'शापित’ से कर रही है। 




आज विश्व पर्यावरण दिवस है। हम हैं तो हमारा पर्यावरण है, हमारा पर्यावरण है तो हम हैं। हमारा पर्यावरण अगर सेहतमंद नहीं हैं तो हम अपने स्वास्थ्य के प्रति निश्चिंत नहीं हो सकते। भारत की बहुत सी नदियों पर जलप्रदूषण-संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हालाँकि बहुत सी योजनाएँ और सरकारी प्रयास नदियों के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये किये जा रहे हैं। फिर भी पर्यावरण विशेषज्ञ
एक जनवरी 1965 के दिन के एक बजे लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की 77वीं वर्षगांठ के शुभ अवसर पर धापा (कोलकाता के पूर्वी सीमांत) स्थित श्री सत्यनारायण भवन परिसर में भव्य अभिनंदन समारोह का आयोजन हुआ था। अभिनंदन के समापन समारोह के उपरांत संत जेवियर कालेज, रांची के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रामसुहाग सिंह ने भिखारी ठाकुर का साक्षात्कार किया। प्रो. सिंह द्वारा किये गये इस साक्षात्कार को काफी वर्षों बाद रांची से प्रकाशित होने वाली अश्विनी कुमार पंकज की पत्रिका विदेशिया में 1987 में प्रकाशित किया गया था.
मार्कण्डेय