Saturday, January 24, 2009

एक महोदय बोले लड़कियों को कम फैशन करना चाहिए

पेशे से पत्रकार सुनील डोगरा ज़ालिम 'नारी की कहानी' नाम से ब्लॉग चलाते हैं, जिसपर बहुत लम्बे समय ये नारियों के पक्ष, उनके अधिकारों के पक्ष में खड़े होते रहे हैं। गाँधीवाद सोच रखने वाले जालिम हिन्द-युग्म के यूनिपाठक भी रह चुके हैं। आज राष्ट्रीय बालिका दिवस पर अपनी बात इन कतरनों में कह रहे हैं॰॰॰


आज फिर बालिका दिवस है। मतलब आज फिर लोग चिल्लायेंगे.. नारे लगेंगे और टीवी पर फोटो खींचेंगे. हाँ ब्लॉग भी खूब चमकेंगे... लेकिन....

कार्टून- मनु बेतखल्लुस
बहुत दिन नहीं हुए... शायद १५ दिन.. मैं अपने दोस्त के घर में था . तभी एक फ़ोन आया.. मेरे दोस्त के पिताजी को. उनके किसी साथी को यहाँ बच्चे का जन्म हुआ था...
क्या हुआ लड़का..? उन्होंने पूछा..
स्पीकर बंद था.. दूसरी तरफ की आवाज़ मैं न सुन सका..
अंकल के चेहरे से ख़ुशी गायब हो गयी.. वो जोर से बोले ...क्या करते हो गुप्ता जी फिर लड़की ....मेरी आँखों के आगे अँधेरा छा गया... स्पीकर अभी भी बंद था..लेकिन दूसरी तरफ से आवाज सुनाई दी... ऐसा नहीं होता अंकल जी... लड़कियां बहुत अच्छी होती हैं.. मुझे लड़की ही चाहिए थी.

टीवी पर चर्चा हो रही थी. एक लड़की का बलात्कार हो गया था. एक महोदय बोले लड़कियों को कम फैशन करना चाहिए... लेकिन क्यों.....
कई प्रश्न उठते हैं.. सबसे पहला कि क्या कम फैशन करने से ऐसे अपराध नहीं होंगे? इससे भी खतरनाक प्रश्न यह है कि ऐसे अपराध करने वाले लोग भेड़िये हैं... जो लड़कियों को देखते ही आप खो देते हैं.. अगर सचमुच ऐसा है तो पर्दा करने की जरूरत किसे है?.. ऐसे संदिग्ध लोगों की आखों पर पट्टियाँ बांध देनी चाहिए.. पर्दे की जरूरत उन लोगों को है न की मासूम लड़कियों को..
दूसरी बात क्या सचमुच फैशन ही जिम्मेदार है ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के लिए? तो क्या कारण है की दूध पीती बच्चियों के बलात्कार हो जाते हैं? क्यों मानसिक रूप से विक्षिप्त लड़कियों पर कहर टूटता है..
यह कैसी सोच है कि फैशन पर रोक लगा दो... रोक तो उन लोगों पर लगनी चाहिए जो ऐसे भयानक बयान देते हैं.. सोच बदलनी होगी ऐसी लोगों की.. अगर नहीं तो ऐसी सोच रखने वालों को ही बदल देना होगा..
सुनील डोगरा 'ज़ालिम'

इससे जुड़ी प्रविष्टियाँ-

1. बालिका दिवस का नारा
2. एक अज्ञात कन्या का मर्म
3. मेरी बगिया की नन्ही कली
4. अपराधबोध!!!
5. कठपुतलियां तो नारी हैं
6. कन्या भ्रूण हत्या
7. दोषी कौन?
8. क्या नारी शक्ति आवाज़ उठा पायेगी?

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7 बैठकबाजों का कहना है :

आलोक सिंह "साहिल" का कहना है कि -

baithak mein aapka swagat hai bandhu!
bilkul sahi vimarsh jalim ji,aapke dwara uthaye gaye sawaal bilkul dahlaane wale hain.......
ALOK SINGH "SAHIL"

Nirmla Kapila का कहना है कि -

bahut hi sahi kaha aur kahne ka lehja bahut achha laga bdhaai

संगीता पुरी का कहना है कि -

सही कहा....सोंच बदलनी होगी लोगों की....नहीं तो ऐसे बालिका दिवस आते जाते रहेंगे....और महिलाओं की स्थिति ज्‍यों की त्‍यों ही रहेगी....सभी बालिकाओं को उनके बेहतर भविष्‍य के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं।

anil kumar trivedi का कहना है कि -

"ladkiyon ko kam fashion karna chahiye" ..mahoday ka kahna kuch hadd tak sahi hai..yahan unka(mahoday ka) arth aise "fashion" se hai jishme foohadtaa evam beshrmi ka samaavesh hota hai aur tv cinema gharon mein parosa jaata hai...aur jin tv prograamme mein ye sab dikhya jaata hai usko hum parivaar ke saath baithkar dekh bhi nahi paate ...saayad aisi hi kuch baatein Mahoday ko ye kahne par majboor karti ho ki"ladkiyon ko kam fashion karna chahiye"

rachana का कहना है कि -

आप ने बहुत खूब लिखा ही सभी को सोचना होगा .मनु जी आप का कार्टून पूरी किताब ही जितना चाहो पढ़ लो
सादर
रचना

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

बैठक पर आपको देख कर अच्छा लग रहा है ज़ालिम जी....

निखिल

रेनू जैन का कहना है कि -

बिल्कुल सही कहा महोदय... सोच बदलनी होगी या फिर ऐसा सोचने वालों को ही बदलना होगा. बाहर देशों में तो लडकियां ऐसे ऐसे कपड़े पहन कर बाज़ार में निकलती हैं की हम कल्पना भी नहीं कर सकते. फिर भी वहां लडकियां अपने आप को अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं. इससे तो यही समझ में आता है की फैशन नहीं बल्कि हमारी मानसिकता में ही कहीं कोई कमी है. और बदलना लड़कियों को नहीं बल्कि समाज की इस बदबूदार मानसिकता को बदलना चाहिए.

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