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Thursday, March 18, 2010

मैंने अपने लिये सबसे सेफेस्ट खान को चुना हैः करीना कपूर

आज कल करीना कपूर फिल्मों की व्यस्तता को छोड कर अपने परिवार के साथ व्यस्त हैं। और हो भी क्यों नहीं , क्योंकि हाल ही में उन्हें दूसरी बार मासी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। हमने उन्हें इस दूसरी बार मासी बनने की खुशी में बधाई देते हुए उनके व्यक्तिगत जीवन फिल्मों के बारे में लंबी बातचीत कर ली।

कैसा लग रहा है जब आपको दूसरी बार मासी बनने का सौभाग्य मिला है?
- यह तो अच्छा ही लग रहा है। नया बच्चा ‘कियान’ वाकई बहुत ही ख़ूबसूरत है। सामरिया बहुत कुछ संजय कपूर पर लगती है परन्तु यह नया बच्चा बहुत कुछ करिश्मा पर गया है। यह हमारे परिवार के लिए एक उत्सव मनाने का समय आया है क्योंकि बहुत दिनों बाद इस परिवार में लड़‌के का आगमन हुआ है।

आपकी फिल्म 3 ईडियट ने सफलता के सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं और आपने आमिर के साथ अपनी फिल्मी ज़मीन मजबूत कर ली है, कैसा लग रहा है आपको?
-मैं समझती हूँ कि यह सब इसलिए भी हुआ है क्योंकि यह राजू हिरानी की फिल्म थी तथा मैं और आमिर पहली बार साथ में आ रहे थे इसलिए लोगों को फिल्म से बहुत उम्मीद भी थी। मैं समझती हूँ कि हमारी जोड़ी को लोगों ने पसंद भी किया।

क्या आपने इस फिल्म को राजू और आमिर के होने के कारण किया?
-मेरी हर फिल्म में चाहे वो अच्छी हो या बुरी हो, मैंने दूसरे कलाकारों के सामने अपनी मौजूदगी को बनाए रखी है। मेरा ‘ एजन्ट विनोद ’ व ‘ गोलमाल 3 ’ में भी जबरदस्त रोल है। मैं अपनी हर फिल्म में बहुत मेहनत करती हूँ क्योंकि मैं अपने आपको एक स्टार के पहले एक अच्छे कलाकार के रूप में पेश करना चाहती हूँ। मुझे यह अच्छा नहीं लगता कि कोई मुझसे कहे कि मैं अपनी फिल्म में अच्छी लग रही थी क्योंकि मैं जानती हूं कि कोई भी मुझे अपनी खूबसूरती के लिए नहीं अपने टेलेंट के लिए अपनी फिल्म में लेता है। मैं यहां अपना टेलेंट दिखाने के लिए हूं न की अपनी खूबसूरती और इसी कारण से मुझे लडकों की प्रमुखता वाली फिल्म 3 ईडियट में भी लिया गया। मुझे लगता है कि मेरा दर्शक वर्ग मुझे ‘ कम्बक्त इश्क ’ जैसी फिल्मों में देखना पसंद नहीं करता है और यह गलती मैं दोबारा दोहराना नहीं चाहती।

फिल्मकुर्बानका रिव्यू अच्छा है फिर आपने उसमें काम क्यों नहीं किया?
- जरूरी नहीं कि मैं हर फिल्म करूँ। जो वक्त के अनुसार सही लगे वही करना चाहिए। एक एक्टर को एक एक्टर की तरह रहना चाहिए। ऐसा नहीं कि दो सुपरहिट देने के बाद कलाकार सुपर स्टार बन जाता है उसे अपनी फ्लाप फिल्मों का भी ध्यान रखना चाहिए क्योंकि दर्शकों कह निगाह में वह महत्वपूर्ण होता है।

आपकी फिल्म साइन करने के लिए एक लंबे प्रोसेस से गुजरना पड़ता है?
- कई बार ऐसा होता है और कई बार नहीं भी। हम एक्टर एक वैज्ञानिक की तरह होते है जो अलग-अलग प्रयोग करता रहता है। लोग जानते है कि करीना रिस्क ले सकती है और मैंने ‘चमेली’ जैसी फिल्म करना स्वीकार किया। मैं इस बात की परवाह नहीं करती कि लोग टशन के बारे में क्या कहते है। मैंने फिल्म में अपना किरदार को जीवंत करने के लिए अपनी बॉडी लेंगवेज को हर तरह से चेंज किया। कितनी एक्ट्रेसेस हैं जो इस प्रकार की चुनौती को स्वीकार कर पाती है वो भी इस पुरूष प्रधान इंडस्ट्री में। टशन मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है क्योंकि उसी दौरान मैं सैफ से मिली थी। कभी-कभी फ्लाप फिल्म भी एक्टर के लिए एक बडी न्यूज बन जाती है।

आप सभी खान कलाकारों में चुनने में क्या ध्यान करती हैं?
- मैंने अपने निजी जीवन के लिए सबसे सेफेस्ट खान का चुनाव कर लिया है। बाकी सभी खानों में सभी एक दूसरे से अलग लगते हैं। सैफ और मैं एक दूसरे के करीबी दोस्त हैं और आमिर और शाहरूख हमारे परिवार जैसे हैं। मेरी बहन सलमान को पसंद करती है।

पर सबमें हो रही प्रतिस्पर्धा जग जाहिर है?
- यहां केवल बीकाऊ 3 या 4 है तो यह प्रतिस्पर्धा तो होनी ही है लोगों के पास कोई चाइस भी तो नहीं है।

आज कल फिल्म इंडस्ट्री में आपको सबसे महंगी एक्ट्रेस के रूप में आंका जा रहा है?
- मैं नहीं जानती । पर आप बताइये हर दिन यह रिपोर्ट आती है कि फलानी एक्ट्रेस इतना लेती है, फलानी इतना। यदि सबसे ज्यादा प्राइज लेने वाली एक्टेªसों की लिस्ट बने तो शायद मेरा उसमें आखरी दस में नाम आयेगा।

आपके और सैफ के संबंधों को लेकर बहुत सारी चर्चाए होती रहती हैं आप उनको किस प्रकार से लेती हैं?
- मेरे व सैफ के संबंध स्पष्ट हैं। हमारे बारे में बहुत कुछ छपता रहता है कि आज हमनें शादी करली, कल तलाक हो गया इन सब गौसिफ का हम मजा भी लेते है। पर हां , जब हम शादी करेंगे तब सारा जमाना जान जाएगा। ये सब कुछ जल्द होने वाला भी है।

आप अपने व्यस्त समय में से परिवार के लिए समय किस प्रकार निकाल पाती हैं?
-मैं बहुत सा समय निकाल लेती हूँ। एक एक्टर के लिए जो लगातार काम कर रहा हो समय निकालना जरूरी है। मैं साल में चार फिल्मों से ज्यादा नहीं करती । मैंने अपने सेक्रेट्री से भी कह रखा है कि हर तीन महीनों के बाद मुझे ब्रेक चाहिए। मैं सारा साल एक साथ काम नहीं कर सकती।

सुना गया था कि आप भी आई पी एल टीम खरीदने वाली थीं?
- हम इसके लिए गये भी थे व पेपर वर्क भी पूरा किया था पर ये सब केंसल हो गया। यदि दोबारा मौका मिला तो यह सब सैफ के समझ का काम है मैं तो केवल फिल्मों के बारे में जानती हूं।

तो क्या आप प्रोडक्शन हाउस खोलने में रूचि रखती है?
- मैं अपने लिए तो फिल्म बनाने से रही। अभी तो बाहर की फिल्मों से ही समय नहीं मिल पा रहा हैं। अभी एक फिल्म मधुर भंडारकर के साथ करने का प्लान चल रहा है। पटकथा लिखी जा रही है पर अभी सब कुछ तय नहीं हुआ है।

‘मिलेंगे-मिलेंगे’ के बारे में रोज सुना जा रहा है पर पता नहीं कब मिलेंगे?
- यह तय हो चुका है कि फिल्म जल्द रिलीज होने जा रही है । मैंनें अपनी ओर से निर्माता बोनी कपूर को कह दिया है कि मैं फिल्म के प्रमोशन के लिए तैयार हूं । बाकी जो कुछ मीडिया में छप रहा है मेरे व ‘ााहिद के बारे में उसके लिए हम आदि हो चुके है।

प्रस्तुतिः अशोक भाटिया

Sunday, March 14, 2010

शापित से बहुत कुछ सीखने को मिलाः श्वेता अग्रवाल

श्वेता अग्रवाल फिल्म ‘शापित’ से पहले टर्की की एक फिल्म ‘मिरार’ में और ओलिवर पॉलिस की स्विस जर्मन फिल्म ‘तंदूरी लव’ में भी अभिनय कर चुकी हैं। ‘स्टार प्लस’ पर प्रसारित धारावाहिक ‘देखो मगर प्यार से’ में मोटी-सी लडकी के किरदार में नज़र आ चुकीं श्वेता अग्रवाल इन दिनों फिल्म सर्जक विक्रम भट्ट की खोज के रूप में उनकी आगामी फिल्म ‘शॉपित’ में अभिनय करके चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इस फिल्म में उनके हीरो है मे मशहूर संगीतकार उदित नारायण के बेटे आदित्य नारायण हैं। देखा जाए तो यह फिल्म श्वेता के लिए डेब्यू होगी व अपनी बॉलीवुड की पहली ही फिल्म विक्रम भट्ट की हॉरर फिल्म 'शापित’ से कर रही है।

प्रश्न- कैसा लग रहा है अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म को करके ?
- पहले मैं बहुत ही डरी हुई थी कि बॉलीवुड में मेरी पहली फिल्म ही विक्रम भट्ट जैसे महान निर्देशक के साथ करने को मिल रही है । फिल्म 'शापित’ एक हॉरर फिल्म होने के साथ साथ प्रेम कहानी वाली भी फिल्म हैं। विक्रम भट्ट उन निर्देशकों में से हैं, जो अपने दर्शकों को अपनी फिल्म के द्वारा एक जगह पर बैठे रहने के लिए मजबूर कर देते हैं। मुझे पूरा यकीन हैं कि उनकी फिल्म ‘शापित’ दर्शकों निराश नहीं करेगी। इन्ही सब कारणों से मुझे इस फिल्म को करने में मजा आ रहा हैं।

प्रश्न- इस फिल्म में अपने किरदार के बारे में बताइए?
- इस फिल्म में मैंने काया का किरदार निभाया है जो कि एक रायल परिवार की कॉलेज में पढने वाली लडकी है । काया को इस बात की जानकारी नहीं है कि उसके परिवार को 300 साल पहले एक श्रॉप मिला था जिसकी वजह से इस परिवार की कोई लडकी जब भी शादी करना चाहेगी तो बुरी ताकत उसे खत्म कर देगी ।प्यार के सागर में डूबी काया अपने प्रेमी अमन से सगाई करके जैसे ही सगाई की अंगूठी पहनती हैं वैसे ही वह बुरी आत्मा उसके पीछे पड जाती हैं । तब काया के माता पिता काया को उसके शापित होने की बात बताते हैं। इसके बाद भी काया का प्रेमी अमन उससे रिश्ता नहीं तोडता क्योंकि काया और अमन ने तो पूरी जिन्दगी एक साथ रहने का इरादा पक्का किया हुआ हैं । फिर यह दोनों उस बुरी आत्मा से बचने के लिए क्या क्या नहीं करते हैं यह डरावना मंजर इस फिल्म में दिखाया गया है ।

प्रश्न- आपको नहीं लगता कि आपको अपना कैरियर हॉरर फिल्म से शुरू करना महंगा पड़ सकता हैं?
- मैं मानती हूं कि बॉलीवुड में हॉरर फिल्म के साथ कैरियर शुरू करना काफी रिस्की है। लेकिन मुझे इसमें कोई रिस्क नहीं लगता और न ही किसी से मेरी इस बारे में शिकायत है। मुझे विक्रम भट्ट की फिल्म होने से इस फिल्म पर पूरा भरोसा है। वैसे ‘शापित’ में पागलपन वाला हॉरर नहीं हैं। इसमें एक प्रेम कहानी है। काया और अमन एक दूसरे से बहुत ज्यादा प्यार करते हैं। वे एक दूसरे पर जान न्यौछावर करने वाला प्यार करते है। बुरी आत्मा से बचने के लिए वे क्या क्या नहीं करते हैं और बुरी आत्मा किस तरह उनका पीछा करता है और कई तरह के घटनाक्रम होते है। इस फिल्म की कहानी में रोचकता के साथ डरावनापन भी है।

प्रश्न- फिल्म की शूटिंग के दौरान क्या अनुभव रहा ?
- इस फिल्म में काम करना मेरे लिए बहुत बडी चुनौती के रूप में था क्योंकि मैं भी एक जगह बैठकर हॉरर को नहीं देख सकती थी। इसी वजह से इस फिल्म की शूटिंग के दौरान मैं खुद डरी हुई रहती थी। एक बार एक ऐसा दृश्य फिल्माया जा रहा था, जिसके लिए मुझे एक जगह बंद कर दिया जाता हैं। वहां मिट्टी थी, गंदगी थी और जगह इतनी सकरी थी कि मैं हिल डुल भी नहीं सकती थी। दीवार से चेहरा सटा हुआ था। मैं न बाहर वालों की आवाज सुन सकती थी, न बाहर वाले मेरी। कैमरा अपना काम कर रहा था। तभी अचानक एक मकड़ी वहां आ गयी। मकड़ी से तो मैं बहुत डरती हूं। मुझे लगा कि मेरी जिन्दगी खत्म हो गयी। मैं बुरी तरह डर व सहम गई थी। जैसे ही सीन ओ.के. हुआ व दरवाजा खुला, मैं जोर-जोर से रोने लगी। डरी सहमी मैं आधे घंटे तक रोती रही। विक्रम भट्ट वगैरह ने मुझे काफी समझाया। बडी मुश्किल से दो घंटे बाद मेरे अंदर का डर खत्म हुआ और मैं नॉर्मल हो सकी।

प्रश्न- निर्देशक विक्रम भट्ट के साथ काम करने का क्या अनुभव रहा?
-बहुत ही अच्छा अनुभव रहा। मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। हर फिल्मकार की काम करने की अपनी अलग स्टाइल होती है। विक्रम भट्ट की तो स्टाइल ही अलग हैं। वह तो हमारे गुरू की तरह हमें काम के बारे में बता रहे थे। उन्होंने हमारी बहुत मदद की । वह खुद सीन करके बताते थे कि हमें किस प्रकार करना है। इसके बावजूद जब समस्या हल नहीं होती थी तो वह दृश्य में कुछ बदलाव भी करते थे। विक्रम भट्ट जी खुल विचारों के है। उनके साथ काम करके बहुत ही मजा आया। मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा।

प्रश्न- क्या कारण है कि ‘शापित’ बन कर तैयार है और आपने अभी तक कोई दूसरी फिल्म साइन नहीं की है?
-मैं पिछले डेढ साल से ‘शापित’ के साथ इस तरह जुडी हुई हूँ कि कुछ और सोचने का मौका ही नहीं मिला। मेरे दिमाग में ही नहीं आया कि मुझे किसी नये प्रोजक्ट से भी जुडना चाहिए। अब जब आप लोग सवाल कर रहें हैं तो मुझे लगता हैं कि अब मुझे दूसरी तरफ भी ध्यान देना पडेगा। मुझे हर निर्माता-निर्देशक व कलाकार के साथ काम करना हैं बशर्ते अच्छी पटकथा व उसमें मेरा किरदार दमदार हो। मैं यहां तब तक रहूंगी जब तक मुझे काम मिलेगा और लोग मुझे परदे पर देखना पसंद करेंगे। मैं अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ परफार्मेंस देने का पूरा प्रयास करूंगी।

प्रश्न- आप अंतरराष्ट्रीय फिल्मों से पहले अपने कॉलेज के दिनों में ‘देखो मगर प्यार से’ एक धारावाहिक भी कर चुकी हैं तो क्या अब टी वी सीरियल भी करेंगी?
-फिलहाल तो मैं फिल्में ही करना चाहूँगी जो मेरी प्राथमिकता है पर भविष्य में कुछ अच्छा ऑफर मिला तो टी वी भी कर सकती हूँ।

प्रस्तुतिः अशोक भाटिया

Tuesday, March 09, 2010

मैं एकता कपूर से नहीं डरती - ज्योति गाबा


फिल्म 'इडियट बॉक्स' का एक दृश्य'

ज्योति गाबा का नाम लेने पर लोगों के जहन में उनका चेहरा नहीं आयेगा पर यह निश्चित हैं कि फिल्म ‘इडियट बाक्स’ के रिलीज होते ही यह नाम घर-घर में चर्चा का विषय होगा। इस फिल्म की कहानी इस बात पर आधारित है कि टी वी ने लोगों की जिन्दगी में कितना अहम दखल देना शुरू कर दिया है। इस फिल्म में ज्योति टी वी की चर्चित सुपर स्टार क्वीन एकता कपूर से प्रभावित किरदार अनेकता कपूर निभा रही हैं। हाल ही में फिल्म के प्रचारक आई एम पन्नू ने फिल्म पत्रकार अशोक भाटिया की बातचीत ज्योति से करवाई। पेश है उस बातचीत के प्रमुख अंशः-

प्रश्न- जब आपको इस फिल्म में इस महत्वपूर्ण किरदार के लिए चुना गया तब आपको कैसा महसूस हुआ?
ज्योति- यह एक अलग ही प्रकार का अनुभव है। जब मुझे पहली बार इस फिल्म में मुझे मेरा किरदार सुनाया गया तो मुझे लगा कि यह मेरे लिए बहुत ही चुनौतिपूर्ण किरदार है। आज एकता कपूर बहुत बड़ा नाम है और यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मैं ऐसी भूमिका कर रही हूँ जो एकता कपूर से प्रभावित है।

प्रश्न- आपने इस भूमिका को करने के लिए किस तरह की तैयारी की और फिल्म के पर्दे पर उसे उतारने में किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
ज्योति- सच बताऊँ तो मुझे इस तरह की भूमिका कैमरे के सामने करने में जरा भी कठिनाई नहीं आई क्योंकि मुझे पहले से ही इस भूमिका के बारे में बहुत कुछ बता दिया गया था। इस फिल्म के निर्देशक सुनन्दा मित्रा ने पहले ही से इस भूमिका के बारे में विस्तार से समझा दिया था और स्पष्ट था कि मुझे कैमरे के सामने किस प्रकार प्रस्तुत होना है। इसके अलावा मुझे इसके लिए कुछ खास होमवर्क नहीं करना पडा था।

प्रश्न- इस समय आप इस फिल्म को लेकर कितना उत्साहित हैं?
ज्योति- मैंने इसके पहले फिल्म ‘थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक’, ‘सुनो ना’ वगैरह की है तथा बहुत से धारावाहिक किये हैं पर पहली बार कुछ अलग करने को मिला है। यह मेरे पिछले काम से बिल्कुल ही अलग है। मैंनें अब तक 300 विज्ञापन फिल्में की है उसमें से बहुत-सी जवान गृहिणी अथवा जवान प्यारी माँ की भूमिकाए वाली थीं। इस फिल्म में मेरे लिए एक मौका था कि मैं अनेकता कपूर के रूप में अपने को एक अच्छे कलाकार के रुप में स्थापित कर सकूँ। इसलिए इस फिल्म को लेकर उत्साहित होना स्वाभाविक है।

प्रश्न- नाम व आपके मेकअप के अलावा आपकी कौन-सी बात एकता कपूर से मिलती है?
ज्योति- एकता कपूर बालाजी टेलिफिल्म की मुखिया हैं और इस फिल्म में मेरी कंपनी का नाम लालाजी टेलिफिल्म है। एकता हाथ में अंगुठियाँ पहनना पसंद करती हैं और फिल्म में मैं भी बहुत सी रिंगस् पहनती हूँ। मेरी चाल-ढाल, पहनावे को भी बिल्कुल एकता के समान दिखाया गया है।

प्रश्न- आप असल जिन्दगी में एकता से मिल चुकी हैं?
ज्योति- दुर्भाग्यवश नहीं, पर एक अवार्ड फंक्शन में मैंने उनको बहुत ही करीब से देखा था, बस। परन्तु मैंने उनके बारे में बहुत कुछ अखबारों में पढ़ा है। कुछ बातें मुझे उसके करीबी दोस्तों से भी जानने को मिली और उन सब बातों की जानकरी होने के कारण मुझे अपनी भूमिका निभाने में सहायता भी मिली। मैंने जो जानकारी प्राप्त की थी उसके अनुसार एकता बहुत ही कड़क व मेहनती महिला है।

प्रश्न- क्या आपको लगता है कि एकता इस फिल्म को देख कर कुछ नाराज़ होंगी?
ज्योति- नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता। हमारा ऐसा कुछ विचार नहीं था कि उनको इस फिल्म के माध्यम से थोड़ा भी अपसेट किया जाए। वह स्वयं एक समझदार फिल्म निर्माता हैं। उन्हें पता है कि फिल्म को फिल्म की दृष्टी से ही देखा जाता है, व्यक्तिगत तौर पर नहीं। हमने फिल्म में उनको सकारात्मक रुप में पेश किया है और फिल्म देख कर उन्हें फिल्म पर गर्व होगा।


प्रश्न- फिल्म के रिलीज के समय यदि आपका सामना एकता कपूर से हो गया तो आप क्या करेंगी?
ज्योति- मैं उनसे डरूँगी नहीं बल्कि उनके पास जाकर नम्रता से अपना परिचय दूँगी कि ....हाय मैं अनेकता कपूर हूँ।

प्रश्न- भविष्य में और कोई जिन्दा आदमी का किरदार जिसे आप अपने अभिनय द्वारा पर्दे पर साकार करना चाहें?
ज्योति- हाँ, ऐसा मौका मिला तो मैं सोनिया गांधी की भूमिका करना चाहूँगी।

प्रश्न- अंत में आप ‘इडियट बाक्स’ के बारे में चंद शब्दों में क्या कहना चाहेंगी?
ज्योति- यह कोई हकीकत नहीं है। एक हास्य फिल्म है। जब भी दर्शक इस फिल्म को देखे तो महसूस करें कि यही आज घर-घर की कहानी है और उसे अपने ही घर की कहानी समझे। मुझे आशा है कि दर्शक इस फिल्म को अवश्य स्वीकार करेंगे।

प्रस्तुति: अशोक भाटिया