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Wednesday, March 11, 2009

आज की ताज़ा खबर

1) हमारे शैलेश जी एक फिल्म (चला मुरारी हीरो बनने ) देखकर वापस आ रहे थे,चूँकि उनकी शर्ट सुर्ख लाल रंग की थी अतः एक सांड़ ने उन्हें उठा कर पटक दिया और उनकी हड्डियों का चुरमा बन गया है। और इसलिए वो हिन्द-युग्म का कोई भी काम कर पाने मे आजकल असमर्थ हैं।

2)"ओरिसा में बाढ़ का कहर"- प्रशासन अत्यंत परेशान है, कारण है की तपन शर्मा हमारे हिन्द-युगम के कर्मठ सहयोगी आजकल ओरिसा में हैं, घर की याद में इतना रो रहे हैं कि समस्त ओरिसा बाढ़ की चपेट में है, हालत बेकाबू देखकर, वहाँ के मुख्यमंत्री ने उनकी फर्म से अपील की है कि उन्हें तत्काल वापस बुलाया जाए, जिससे ओरिसा के हालत को कुछ काबू किया जा सके।

3) आचार्य जी की मल्लिका शेरावत के साथ एक संक्षिप्त मुलाकात- आचार्य जी ने उन्हें जीवन दर्शन के बारे में समझाया किंतु जब मल्लिका जी ने अपने जीवन दर्शन के बारे में बताना चाहा तो, संजीव जी सर पर पैर रखते भागते हुए नज़र आए।

4) राघव जी अपनी मोटर साइकल से अंतरिक्ष की सफल उड़ान के लिए एक प्रयोग कर रहे हैं इन दिनों, पिछली सीट के लिए कोई अंतरिक्ष यात्री की तलाश में हैं। रंजना जी, रूपम जी, शोभा जी, पूजा जी, शन्नो जी, सीमा जी व नीलम जी ने उनकी अपील को ठुकरा दी है, अब वो बुझे मान से अपनी पत्नी को मनाने में लगे हुए हैं। ईश्वर उनकी यात्रा शुभ करे!

5) अरूण जी और मनु जी ने खुदकुशी करने की कोशिश की, मोके पर पुलिस ने पहुँच कर पड़ताल की और नीलम जी को सख़्त हिदायत दी की चाहे वो प्रतियोगिता में भाग लें या न लें, उन्हें सर्वश्रेष्ट प्रतिभागी ही घोषित करेंगी, इसका नीलम जी ने पूरा-पूरा आस्वसान दिया है।

6) सजीव जी, आजकल बेहद परेशान हैं, उनके आवाज़ के साथियों के गालो मे मेंढक घुस गये हैं और वो सब सिर्फ़ टर्र-टर्र कर रहे हैं। इस कारण से मार्च की कविता पाठ में विलंब हो रहा है क्योंकि कविता पाठ करने वाले सभी लोग सिर्फ़ टर्र-टर्र कर रहे हैं। उम्मीद है कि सजीव जल्दी ही इस समस्या से अपने आप को उबार लेंगे।

7) समस्त प्रवासी हिंद-युग्मी नाराज़ हो गये हैं, क्योंकि हिंद-युग्म ने उन्हें गुलाल और गुझिया का पार्सल अभी तक नहीं पहुँचाया है। इसलिए सभी लोग हिन्दुस्तान आकर होली मनाने का मन बना चुके हैं, अभी अभी खबर मिली है कि कुछ लोग वहाँ से चल भी चुके हैं।





बुरा न मानो होली है, होली का हुड़दंग आप सभी को उल्लासित करे इसी ख्वाहिश के साथ-

नीलम मिश्रा व निखिल आनंद गिरि

Tuesday, March 10, 2009

होली पर युग्मियों के कार्टून

हर जगह रंगों भरी पिचकारी डाली जा रही है। कार्टूनिस्ट मनु बेतख्लुस ने इस बार अपनी कूची का रंग कुछ हिन्द-युग्म से जुड़े हिन्दी कर्मियों पर लगाया है। देखें और सराहें--









Saturday, January 03, 2009

....उठता है धुंआ

ब्लॉगिंग की सबसे बड़ी खासियत यही है कि आपकी नाराज़गी या खुशी जगजाहिर होने में चंद मिनट लगते हैं...हिंदयुग्म का वार्षिकोत्सव खत्म होते ही मुख्य अतिथि राजेंद्र यादव की कार्यक्रम में कही बातों पर तरह-तरह के मूड बनने लगे थे.... हिंदयुग्म की शोभा महेंद्रू ने सबसे पहले अपने ब्लॉग पर "शर्मिंदा हुई हिंदी" शीर्षक से नाराजगी ज़ाहिर की....फिर, हिंदयुग्म के कुछ और साथी भी अलग-अलग राय लेकर आये....
शोभा जी का गुस्सा आप यहां पढ सकते हैं....
http://ritbansal.blogspot.com/2008/12/blog-post.html
इस लेख को पढकर हिंदयुग्म की नीलम मिश्रा ने भी अपनी प्रतिक्रिया हमें भेजी..आप भी पढें.....
संपादक


"राजेंद्र यादव जी के बारे में बहुत सारे पूर्वाग्रह तो पहले से ही घुले हुए थे... उन्हें खतरनाक और शर्मनाक में अन्तर नही पता है...उन्होंने कहा कि अब वो खतरनाक बातें कहने जा रहे हैं, वो सारी शर्मनाक बातें थी....
आप तो अतिथि के तौर पर शैलेश जी द्वारा बुलाए गए थे... हम भी मजबूर थे.."अतिथि देवो भव" भाव को मन में लिए बर्दाश्त करते गए...माननीय यादव जी, हमारा हिन्दयुग्म आपकी राजनीति का मंच नही था, यह काफ़ी आगे निकल गया है, हम विश्व बंधुत्व की बात करते हैं, मानवता की बात करते है, पर आप ............दो पंक्तियाँ कहनी है जो शायद आप जैसे लोगों के लिए ही कही गई हैं-बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर.. पंथी को छाया नही, फल लागे अति दूर मनु जी, आपकी टिप्पणी भी पढी...सही में कुछ बड़े नामों को हम भागदौड़ के चक्कर में मंच से आदर सहित पुकार नहीं पाये...मगर, बड़े आयोजन की छोटी गलतियां अगली बार न हों, इसका पूरा ध्यान रखेंगे...."
साभार
नीलम मिश्रा,
हिंदयुग्म