ऐसा मेरे साथ पता नहीं भाई साहब क्यों होता है कि दो बच्चों को भरा पूरा बाप होने के बाद भी सुबह सैर को जाते-जाते पांव अनायास ही जूतमपैजार हुई प्रेमिका के द्वार की ओर यकायक मुड़ जाते हैं। क्या आप के साथ भी ऐसा होता है ?
अब पता नहीं बंदे की किस्मत ही खराब है या आदमी सच्ची को गलती का पुतला है। आदमी भी क्या कुत्ती(यहां आप बीप की आवाज़ के साथ पढ़ें) चीज है भाई जी, सेहरा बांध कर बाजे गाजे, पियक्कड़ दोस्तों की टोली के साथ दारू-शारू पीकर, बूढ़ी घोड़ी को रूलाता, अग्नि को साक्षी मानकर ब्याह कर किसी और को लाता है और प्रेम किसी और से कर बैठता है। आह री जिंदगी!
जिस प्रेमिका के चक्कर में पड़ लोक-लाज को लात मार सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेंगे पर रख धर्म बदल, कर्म बदल दो बच्चों को एक्स बाप की यादों के सहारे छोड़ अपनी पत्नी के सिंदूर में से चुटकी भर सिंदूर अपनी प्रेमिका को दे शान से सबकी थू थू को थू थू करता हनीमून पर निकल पड़ा था वैवाहिक जीवन में एक नया इतिहास रचने तो समाज ने पता नहीं तब क्या क्या नहीं कहा था। समाज का क्या? इसे तो कुछ न कुछ कहना ही होता है। उम्र भर एक ही पत्नी के पल्लू के साथ बंध कर रहो तो भी कुछ न कुछ कहता ही है। मेरा तो मानना है कि आम आदमी को भी जिंदगी में कम से कम एक बार सच्चा प्यार जरूर करना चाहिए। विवाहेतर प्रेम कोई बड़े लोगों की बपौती नहीं। विवाहेतर प्रेम पर सबका हक है। इसलिए जब दाव लगे तब सही।
यारो! ये तो अपनी हिम्मत थी कि टांगों तक बाल सफेद हो जाने के बाद भी हमने इश्क को जिंदा रखने के लिए एक बार फिर सिर ओखली में दे डाला। सबने कहा, "हमारा धर्म केवल एक बार ही ओखली में सिर देने की इजाजत देता है।´ कोई बात नहीं , मुझे तो बस ओखली में सिर देने को जुनून था सो ऐसे भी तो वैसे भी कर दे दिया।
समाज को और तो सब कुछ पसंद आता है पर विवाहित का किसी और से प्यार करना रास क्यों नहीं आता? मैं समाज से पूछता हूं कि विवाह होने के बाद क्या आदमी के भीतर का प्रेमी मर जाना चाहिए? एक ही खूंटे से पुरूष को क्यों बांध कर रखना चाहते हो....हे समाज सुधारकों! पुरूष प्रधान समाज में भी पुरूष के साथ ऐसी ज्यादती! जहां पहले और केवल पहले प्यार के विशुद्ध प्रेमी भी रहते हैं खटपट तो वहां भी होती है। और अपना प्यार तो ....
मुझे पता नहीं लाख बदनाम होने के बाद भी किस आकर्षण ने खींचा कि मैं कल सुबह निकला तो था सेहत सुधार के लिए और जा पहुंचा फिर प्रेमिका के घर। जो प्रेमिका मेरे वियोग में पहले बीसियों नींद की गोलियां खाने के बाद भी न सो पाती थी तब ठाठ से सोई थी।
मुझे ट्रैक सूट में हांफते देख मेरी प्रेमिका की मां ने मुस्कारते हुए पूछा,` और कैसे हो मेरी बेटी को हीरोइन बनाने वाले?´
`जहाज का पंछी अब जहाज पर लौट आना चाहता है।´
`पुराने जहाज का क्या होगा?´ कुछ कहने के बदले मैं चुप रहा।
`हमारी किश्ती में छेद डालकर इतने दिन कहां रहे?´
` विदेश चला गया था।´
` वहां फिर कोई धर्म तो नहीं बदल आए?´
` बदलता तो अखबार में पढ़ नहीं लेतीं आप। खुदा कसम खाकर कहता हूं कि अब जीना छोड़ दूंगा पर ये साथ न छोड़ूंगा। ´
` भौंरें और पतियों पर विश्वास करना है तो कठिन है, पर चलो दिल लुभाने के लिए कर लेती हूं। बेटी! देख तेरा भौंरा लौट आया है।´
`तुम कहां थे इतने दिन हे मेरे प्राणनाथ?´
`प्राणनाथ रास्ता भटक गया था हे मेरी प्रिय!´
` अब तो छोड़कर कहीं नहीं जाओगे न? तुम अगर अबके मुझे छोड़कर गए तो मैं सच्ची को आत्महत्या कर लूंगी। देखो तो समाज ने हमारा हुक्का पानी बंद कर दिया।´
` करने दो। दो प्यार करने वालों के साथ ये और कर ही क्या सकता है।´
`देखो सेकिंड हैंड पति, समाज ने हमारे पुतले जलाने शुरू कर दिए।´
` इससे तो हमारे प्रेम की उम्र ही बढ़ेगी। बट, आलरेडी विवाहित पुरूष पर इतना विश्वास ठीक नहीं प्रिय!´
मैंने अपनी ओर से फ्री होते हुए उसे वैधानिक चेतावनी दी ताकि कल को मुझे और ग्लानि न हो।
`अब विश्वास करने के सिवाय और मेरे पास बचा भी क्या है मेरे भी प्राणनाथ!´
हाय रे प्रेमिका की विवशता!
` चलो, चलो, प्रेस वाले भी आए हैं। एक फैमिली फोटो हो जाए।´ सास ने दनदनाते हुए कहा। ऐसे दामाद किसी-किसी सास को ही नसीब होते हैं न भाई साहब!
`स्माइल प्लीज!´ प्रेस फोटोग्राफर ने कहा तो मुझे लगा जैसे मैं पहली पत्नी के साथ होऊं।
डॉ. अशोक गौतम
गौतम निवास, अप्पर सेरी रोड,नजदीक मेन वाटर टैंक, सोलन-173212 हि.प्र.

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