
..... क्या भारत सरकार की आंखें अब भी खुलेगी?.... अगर 'मेरा देश महान' कहने वाले नेता जब अपनी ही मां, बहनें और पत्नियों को सम्मानजनक स्थान नहीं दे पाते तो...इस देश की छवि दुनिया के सामने कैसी होगी?
डॉ अरुणा कपूर
मनोज भावुक फिलहाल भोजपुरी जगत के सबसे सक्रिय नामों में से एक हैं...मनोज ने भोजपुरी साहित्य के प्रचार-प्रसार का काम भारत के साथ-साथ यू॰के॰, अफ्रीका आदि देशों में भी किया है। भारतीय भाषा परिषद ने मनोज भावुक को उनके गजल- संग्रह "तस्वीर जिंदगी के" के लिये सम्मानित भी किया है। भावुक फिल्म समीक्षक भी हैं और भोजपुरी सिनेमा के बिखरे इतिहास को अपने लोकप्रिय शोध पत्र 'भोजपुरी सिनेमा के विकास-यात्रा" में समेटने की सफल कोशिश की है. भावुक इन दिनों "हमार टीवी" में प्रोग्रामिंग हेड हैं। बैठक पर एक बेहद अहम मुद्दे पर भोजपुरी में ठिठोली करता इनका ये लेख हाज़िर है....
इनका समलैंगिकता नैतिकता से जादे कानूनी दांव-पेच के मसला बन के रह गइल बा...आज हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसला के बाद समलैंगिक समाज के लोग के खुशी के ठिकाना नइखे....मगर भारत जइसन पारंपरिक देश में समलैंगिकता पर असमंजस के स्थिति बा....कोर्ट के कहनाम बा कि धारा 377 जनता के मौलिक अधिकार के हनन बा..एह से दिल्ली हाईकोर्ट भारतीय दंड़ संहिता के धारा 377 के अपराध के श्रेणी से हटा दिहले बा...न्यायालय के कहनाम बा कि अगर आपसी रजामंदी से कवनो वयस्क पुरुष चाहे महिला आपस में संबंध बनावत बाड़न त ऊ धारा 377 के श्रेणी में ना आई....कोर्ट के ई फैसला के बाद समलैंगिक लोग में खुशी के लहर दौड़ गइल बा...एगो लइका अपना बाबूजी के समझावत बा---------
इ आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई
नर नर संगे, मादा मादा संगे जाई
हाईकोर्ट देले बाटे अइसन एगो फैसला
गे लोग के मन बढल लेस्बियन के हौसला
भइया संगे मूंछ वाली भउजी घरे आई....
इ आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई...
खतम भइल धारा अब तीन सौ सतहत्तर
घूम तारे छूटा अब समलैंगिक सभत्तर
रीना अब बनि जइहें लीना के लुगाई
इ आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई....
पछिमे से मिलल बाटे अइसन इंसपिरेशन,
अच्छे भइल बढी ना अब ओतना पोपुलेशन
बोअत रहीं बिया बाकि फूल ना फुलाई...
इ आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई....
इ पछुआ बयार हवे रउरा ना बुझाई...
मनोज भावुक