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Sunday, August 16, 2009

मंदी के दौर में एक और टीवी चैनल !

सभी वर्ग के कस्तूरों के लिए खुशखबरी- हमने तमाम कस्तूरों के हितार्थ टोटल संत चैनल शुरू किया है। यह चैनल फैशन चैनल की तरह चौबीसों घंटे भटके हुए कस्तूरों को मनचाही शांति मुहैया करवाएगा। वैसे भी आज के दौर में फैशन और धर्म एक सिक्के के दो पहलू हैं। अर्थात् फैशन ही धर्म है और धर्म ही फैशन। मनोरोगी कस्तूरे अब चौबीसों घंटे आराम से कुर्सी पर पसर फास्ट फूड के साथ परमानन्द की प्राप्ति करेंगे,ऐसा हमारे चैनल द्वारा हायर किए संतों का विश्वास नहीं,दावा है।

हे भटके जीवो, जब कहीं भी न मिले आपकी स्वयं बुलाई समस्याओं का समाधान, तो शुरू होता है हमारे संत चैनल का काम। और चैनलिया संत परखे आपने हजार बार, हमारे चैनलिया संत परखें बस एक बार! हमारे चैनल के संत आपको स्वर्ग का टिकट, ऑटो टिकट के रेट में दिलवा सकते हैं। वे सज्जन जो ईमानदारी ,शांति से बहुत दूर जाना चाहते हों, हमारे चैनल के संतों के सामने एक बार,बस एक बार, मात्र एक पल के लिए बैठें और जिंदगी भर की अच्छाइयों से छुटकारा पाएं। हमारा संत चैनल सात समंदर पार तक पांव पसार चुका है। राजनेता से लेकर जाली वोटर तक को अपने चंगुल में फंसा चुका है। हमने अपने चैनली संतों के माध्यम से आजतक जिसका भी इलाज किया, वह अपनी पत्नी, प्रेमिका को छोड़ हमारे संतों का दीवाना हो गया, विदेशी दर्शक इस बात का सबूत हैं। कर्म क्षेत्र को छोड़ वह घोर भाग्य प्रेमी हो गया, हमारी बढ़ी टी आर पी इसका साक्षात् प्रमाण है ।

प्यारे सज्जनो और उनकी बहू-बेटियो! आप हमारे चैनल के संतों से ऑन लाइन भी संपर्क साध अपने वर्तमान और भविष्य का संपूर्ण बुरा हाल जान सकते हैं। हमारे चैनल की बीसियों लाइनें अपने भक्तों के लिए चौबीसों घंटे खुली रहती हैं। आप हमारे संतों से एसएमएस और एमएमएस द्वारा नरक जाने की विशुद्ध जानकारी कहीं भी बैठे हासिल कर सकते हैं।

घर में अशांति का निवास न हो पाना,व्यापार में अनुचित तरीके से भी लाभ न मिलना, औरों को पीड़ा न पहुंचा पाना, डट कर हरामीपना करने के बाद भी आत्मा को चैन न आना, बीसियों जुगाड़ों के बाद भी परधन न हड़प पाना, साहब की पत्नी के जूते पालिश करने के बाद भी प्रमोशन न मिलना, लाडलों का बार-बार नकल करने के बाद भी पास न हो पाना, मित्रों से
प्रसन्न रहना, एक पत्नी के होते दूसरी जगह मुंह मारने से डरना, विवाहेतर प्रेम भंग होना, पर पुरूष को लोक लाज के कारण अपना न सकना, विवाहेतर संबंधों में बच्चों की ओर से परेशान रहना, ईमानदारी से चाहकर भी छुटकारा न पाना, ग्रहों पर अंधविश्वास न होना, अहिंसा, देशभक्ति,राष्ट्रीयता जैसे बेइलाज रोगों से हरदम परेशान रहना, रात को सच से डरकर एकाएक जागकर फिर सो न पाना, भोगों से प्रेम में असफलता, झूठे मुकदमों में सफलता पाना, अपने जीवन को हर तरह से समाज दुरूपयोगी बनाने आदि-आदि लाखों रोगियों के असाध्य रोगों का सफल इलाज हमारे चैनल के संतों द्वारा अपने वचनों भर से ही शर्तिया किया जा चुका है, फुल्ल गारंटी के साथ, कोई वारंटी के साथ नहीं। जो भला चंगा आदमी हमारे चैनल के संतों की शरण में आकर बीमार न हो तो अपना संत चैनल तत्काल बंद, चैलेंज के साथ!

वे दुरात्माएं हमारे चैनल के संतों के वचन जरूर सुनें जिनका केवल कर्म पर विश्वास हो। घर में खुशहाली हो। जितना उनके पास हो और वे उसी में प्रसन्न हों, धंधे में ईमानदारी से भी लाभ हो रहा हो। जिन पति-पत्नी में स्वर्गिक प्रेम हो। जो मेहनत की खाने में अंधविश्वास रखते हों। कबूतरबाजों के थ्रू विदेश जाने के इच्छुक भी हमारे चैनलिया संतों का आशीर्वाद ले अपना भाग्य सुधारें। हमारे चैनल के संतों के पास ऐसे-ऐसे तंत्र हैं कि चींटी भी अपना घर-बार बेचकर कबूतर की तरह उड़ कर लंदन की नागरिकता पा जाएगी। जिनको लगे कि जादू-टोना कुछ नहीं होता, जो सब खिलाए-पिलाए को पचा गए हों, वशीकरण करने वाला खुद ही वशीकरण का शिकार हो गया हो तो ऐसे सब रोगी हमारे चैनल के संतों की शरण में सादर आएं, हमारे संत चैनल के दरवाजे चौबीसों घंटे ऐसी पीड़ित आत्माओं के लिए खुले हैं।

हमारे चैनल के संतों ने अपनी अमृत वाणी से बड़ों-बड़ों के दिमाग में कीड़े डाल दिए हैं। जिनको नजर न लगती हो,जो औरों को नजर लगाते हों, जिनको हाय पर विश्वास न हो, जिन सास-बहू में झगड़ा न होता हो, जिनके बच्चों का मन पढ़ाई में लगता हो, जो अपने बच्चों से सदा असंतुष्ट रहना चाहते हों, जिस पति का मन बाहर मुंह मारने को न करता हो, ऐसों की सभी शारीरिक व मानसिक समस्याओं का समाधान हमारे चैनल के संतों के पास है, चुटकी में।

प्रिय दर्शको! पर पत्नी दोष, पर पति दोष,पड़ोसन कष्ट, प्रेमी उपासना में बाधा, और भी सैंकड़ों छोटी-मोटी अपनी अप्रत्यक्ष बाधाओं का हमारे सुधी दर्शक हमारे नामी संतों को बताएंगे, फोन पर सीधे बताएंगे और हमारे संत पलक झपकते करेंगे स्क्रीन पर से ही उनका इलाज। हमारे चैनल के संतों को सुनते ही आपके दिमाग के पिछले जन्मों के मरे कीड़े भी सक्रिय हो उठेंगे। और उनके सक्रिय होते ही आपकी और आपके पूरे परिवार की जिंदगी खुशियों से लबालब हो जाएगी। हमारे चैनल के संतों का सान्निध्य मिलते ही पड़ोसन का पति बस आपको टुकुर-टुकुर देखता रहेगा ,पर कुछ कह नहीं पाएगा,न आपका कुछ बिगाड़ पाएगा, और वह लोक-लाज छोड, सोलह श्रृंगार किए दौड़ी-दौड़ी आपके पास चली आएगी। हमारे संतों की वाणी का असर यह भी हो सकता है कि उसका पति ही उसे आपके घर छोड़ जाए, विदाई गीत गाता। हम अपने चैनल के संतों की ओर से आपको विश्वास दिलाते हैं कि हमारे संत अपनी भोग विद्या से आपको इतना सम्मोहित कर देंगे कि आपको चारों ओर हमारे ही संत शिरोमणि नजर आएंगे।

कुंआरी कन्याएं हमारे संतों को जरूर सुनें। जिनका सामाजिक संबंघों पर अगाध विश्वास हो, जो संबंधों के प्रति अधिक ही संवेदनशील हों, जिनको अपने पर पूरा विश्वास हो, ऐसों को हमारे चैनल के संत रामबाण हैं।

आज का जीव हवा,पानी, भोजन के बिना जी सकता है पर चैनल के संतों के बिना नहीं। झोलाछाप संतों की वाणी से निराश हुए एक बार हमारे संतों को जरूर सुनें। उनके भोग, उपभोग, संभोग के फार्मूलों से आप पलक झपकते भव सागर पार होंगे। अपने केबल आपरेटर से संत चैनल की मांग अवश्य करें । यह आपका जुनूनी हक है।

अशोक गौतम

गौतम निवास ,अप्पर सेरी रोड,
नजदीक मेन वाटर टैंक
सोलन-173212 हि.प्र.

Saturday, July 18, 2009

राखी के स्वयंवर में नामर्द


टीवी पर बीएसएनएल का एक एड आता था, जिसमें प्रीति जिंटा कहती थीं, कि अगर इनके पास बीएसएनएल का कनेक्शन नहीं है, तो वो इनके बेटे से शादी नहीं करेंगी। आजकल टीवी पर एक एड आता है अमूल माचो का.. जिसमें एक लड़के को देखने लड़की और उसके घरवाले आते है और बेचारा लजाता, शर्माता हुआ उनके लिए चाय लाता है। उसके बाद दूसरी तस्वीर में दिखाया जाता है कि कैसे लड़की उसे बाइक पर बैठाकर घुमाने ले जाता है, लड़की स्पीड ब्रेक लगाती है। झटका खाकर बेचारा लड़की से टकराता है। तो एक और तस्वीर में बस में खड़े होकर सफ़र कर रहे एक लड़के को एक लड़की छेड़कर निकल जाती है और बेचारा शर्म से लाल हो जाता है। आखिर क्या ज़माना आ गया है। इतने तक तो ठीक था। लेकिन अब तो सबकुछ उल्टा हो रहा है। राखी सांवत के स्वंयवर के बारे में तो आप सभी जानते होंगे। इस स्वंयवर में नाटक है, रोमांस है, और एक्शन भी। लेकिन राखी के चाहने वालों को न तो इसमें धनुष तोड़ना है और न ही मछली की आंख पर निशाना लगाना है। पूरे फिल्मी ड्रामे से भरी इस कहानी में राखी को किसी हूर से कम नहीं पेश किया है। और लड़के, वो तो बेचारे ऐसे लगते हैं, जैसे किसी रानी के गुलाम। राखी की हर अदा पर झुककर सलाम करने वाले, राखी के झूठ को सच साबित करने वाले, राखी जी बल खाकर चलती हैं, तो बेचारे मुंडे उनके कदमों में बिछे चले जाते हैं। और अगर राखी साहिबा उनसे खुश हो गईं, तो खाने को मिलेंगे लड्डू। शादी के लड्डू के बारे में तो सभी जानते हैं, जो खाए वो पछताए और जो न खाए वो पछताए। लेकिन राखी के साथ सपने बुनकर सभी 16 राजकुमार लड्डू खाना चाहते हैं। और राखी उनके सामने ऐसे पेश आती हैं, जैसे मल्लिका-ए-हिंदुस्तान। हद तो तब हो गई, जब राखी को पाने के लिए वो आग के शोलों पर भी नंगे पांव गुज़र गये। और तो और स्वंयवंर में आई ईवेंट मैनेजर ने दूल्हों को चुनौती दी, कि एक-दूसरे की गर्दन में सरिया फंसाकर जो इसे मोड़ देगा, राखी जी उससे बेहद खुश होंगी। और बेचारे दूल्हों ने ऐसा भी किया। मरता क्या न करता आखिर राखी को जो पाना है। और राखी इतनी बोल्ड हैं कि शो में खुलेआम कह रही हैं कि मुझे इनके छूने से कोई फीलिंग नहीं हो रही है, इनके छूने से मुझे कुछ एहसास ही नहीं हुआ। ये सब जानते हुए भी कि इस शो को सारी दुनिया देख रही है। लेकिन ये तो राखी हैं, राखी को क्या, कुछ भी बोल सकती हैं। बेचारे कुंआरे अब खुद को भरी पब्लिक के सामने नामर्द समझें, या राखी को संतुष्ट करने के लिए किसी नीम-हकीम से मर्दानगी की दवा खरींदे। आखिर राखी को जो पटाना है। लेकिन राखी हैं, कि आराम से पटना ही नहीं चाहतीं। लड़के लाख मिन्नतें कर रहे हैं, इतना ही नहीं, राखी को पटाने के लिए बेचारे एक-दूसरे को भगाने के लिए उसी तरह की ख़तरनाक साज़िशें रच रहे हैं, जैसे किसी रियलिटी शो में लड़कियां एक-दूसरे के खिलाफ़ जाल बुनती हैं। लड़के राखी के सामने हाथ बांधे खड़े हैं, कब मैडम की मेहरबानी हो जाए और उनको मिठाई का डिब्बा मिल जाए। लेकिन मिठाई मिलना सबकी इच्छा नहीं है, हर कोई चाहता है कि राखी उसे वरमाला पहना दें। वाकई ज़माना बदल गया है, अब मां का लाडला अपने लिए बहू नहीं ढूंढ रहा है, बल्कि एक बहू अपने लिए पति ढूंढ रही है। अब पति परमेश्वर होगा, या पत्नी पतिव्रता, ये तो भगवान ही जाने। लेकिन ज़माना सचमुच बदल गया है।

अबयज़ खान

Monday, March 02, 2009

टी आर पी के युग में शो-पीस बनते बच्चे....

अभी पिछले हफ्ते ही टीवी पर एक नया विज्ञापन आया। इसमें एक बच्चे को दिखाया गया है जो बाहर जाकर अपने दोस्तों के साथ खेलना चाहता है पर उसकी माँ उसे बाहर जाने से मना कर देती है। वो दुखी हो जाता है। तभी वो अलमारी से खिलौने का फोन निकालता है और चुपचाप छत पर चला जाता है जहाँ उसे कोई देख न पाये। वो अपने खिलौने से अपने पापा को फोन करता है और कहता है कि माँ खेलने नहीं जाने दे रही तो आप डाँट लगाओ।ये बच्चे की मासूमियत दिखाई गई है। एक... उसे असली और नकली में भेद नहीं पता...दो उसको ये पता है कि फोन से बात कैसे करते हैं और वो मानता है कि पापा का कहना मम्मी मान जायेगी। थोड़ी देर बाद ही उसकी माँ आकर उसको कहती है कि वो पढ़ाई के बाद खेलने जा सकता है और वो भोला बच्चा सोचता है कि उसकी बात पापा तक पहुँच गई है। और उसके बाद उसके चेहरे पर जो खुशी होती है वो देखते ही बनती है। वो खुशी से झूम उठता है।
इसी तरह की एक मासूम कहानी पिछले सप्ताह ही बाल-उद्यान में प्रकाशित हुई। रचना श्रीवास्तव की कलम से निकली मासूम बच्ची की एक मार्मिक कहानी मेरी माँ सिर्फ़ अच्छी है ,सबसे अच्छी नही । इस कहानी को पढ़कर आप बाल-मन को पढ़ सकेंगे। जान सकेंगे कि छोटे से बच्चे के मन में जो भाव होते हैं वो कितने शुद्ध होते हैं। कोई छल कपट नहीं होता। दीन-दुनिया से दूर उनकी अपनी अलग ही दुनिया होती है। इस कहानी ने मुझे भी मन के भीतर तक झकझोर दिया और मैं सोचने लगा कि यदि ये बचपन है तो एक दूसरा बचपन भी पैदा हो रहा है जो आज की हकीकत भी है...
ये दूसरा बचपन है लॉफ्टर शो का.. ये बचपन है नाचने का...ये बचपन है गाने का...ये बचपन है करोड़पति बनने का...एक ऐसा बचपन जिसमें माँ-बाप अपनी इच्छा को बच्चों पर लादते हैं। छोटे-छोटे बच्चे कम्पीटीशन की इस निर्दयी दुनिया में समय से पहले ही पहुँच जाते हैं। कम्पीटीशन की वो दुनिया जिसमें अच्छे से अच्छा खिलाड़ी भी बाहर हो सकता है। उनके ऊपर बोझ होता है अच्छे गाने का वरना जज से डाँट पड़ेगी। उन्हें चाहिये कि वे लोगों को ज्यादा से ज्यादा हँसायें ताकि न्यूज़ चैनलों की खबर बन सकें। उन्हें अच्छा नाचना होता है ताकि सामने बैठे तीन जज ताली पीट सकें और सीटी बजा सकें। उनके आस-पास होते हैं दर्जनों कैमरे, चारों ओर होती है लाइटें, लोग, बोझ... रीयलिटी शो की एक ऐसी "अनरीयल" दुनिया जो खत्म कर देती है मासूमियत को। एक ऐसी झूठी और दिखावटी दुनिया ..जिसमें छल भी होता है... कपट भी होता है... माता-पिता द्वारा किये गये झूठे एस.एम.एस होते हैं...इंटेरनेट पर जाली वोट होते हैं...नाटक होता..ड्रामा होता है...एक ऐसी दलदल होती है जिसमें बचपन फँस जाता है..ऊँच-नीच का पापड़ा...छुपन-छुपाई..आँख-मिचौली खेलने की उम्र में उन्होंने पकड़ रखे होते हैं माइक..क्योंकि वही हैं जो दिलायेंगे माता-पिता को संट्रो कार...और बनायेंगे लखपति..।
आजकल जब ये शो-पीस बच्चे फूहड़ चुटकुले सुनाते हैं तो सचिन और राहुल महाजन उन्हें जज करते है और उन पर हँसते भी हैं। राहुल महाजन॥एक ऐसा शख्स जो शुरु से अब तक विवादास्पद रहा है। ड्रग्स लेते हुए पकड़े जाना, बिगबॉस में अजीब हरकतें करना और अब यहाँ बच्चों के सामने उसको बैठा देना... मुझे हैरानी होती है देख कर और ये सोचकर कि हमारा भविष्य क्या होने जा रहा है... बच्चे गाते हैं और फिल्मी हस्तियों से मिलते हैं तो बहुत खुश होते हैं। पर क्या ये बच्चे भारत का इतिहास और वर्तमान भी जान पाते हैं? क्या पढ़ाई अब गौण होती जा रही है? हाशिये पर फेंक दिया गया है बचपन के खेलों को? क्यों अब कोई पकड़म-पकड़ाई खेलते नहीं दिखता? क्या टी।वी. प्रोग्राम्स के अलावा नहीं हो सकता है बच्चों का मनोरंजन? क्या ये बच्चे सामान्य बचपन व्यतीत कर पायेंगे? इनका भविष्य केवल अलग अलग रीयलिटी शो में आने-जाने और स्टेज पर नाच-गाने में बीत जायेगा? भारत के लिये संगीत-नृत्य के क्षेत्र में नई प्रतिभाओं को ढूँढने के लिये शुरु किये गये इन शोज़ से ये ये नईं कोंपलें कहीं खिलने से पहले ही मुरझा न जायें? क्योंकि इन सबसे चैनल तो फायदा निकाल ले जायेंगे पर पैरों तले रौंद दिया जायेगा बचपन... कैरम, लूडो और साँप-सीढ़ी वाला बचपन...

तपन शर्मा