ज़रा सोचिए, अगर महेंद्र सिंह धोनी भारतीय क्रिकेट में अपनी जगह नहीं बना पाते और झारखंड के ही मैदानों पर चौके-छक्के लगा रहे होते। फिर, उनकी उम्र 29 साल की होती और वो शादी कर रहे होते। तो एक कैमरामैन लड़केवालों की तरफ से और एक लड़कीवालों की तरफ से भाड़े पर मंगाया जाता। ये तो नहीं होता कि देश के सबसे अच्छे कैमरे और सबसे बुद्धिमान होने का भ्रम पाले मीडिया वाले मुफ्त में धोनी की शादी पर खर्च हो रहे होते। मगर, ऐसा हुआ और हमें ताज्जुब इसलिए नहीं हुआ कि मीडिया की ऐसी दीवानगी पहली बार नहीं थी....सानिया-शोएब की शादी भी मीडिया के लिए कूदने-फांदने का ऐतिहासिक दिन था...ऐसे जैसे भारत और पाकिस्तान दोस्ती के सात फेरे लेने जा रहे हों...इसी बीच दंतेवाड़ा में 76 जवान मारे गए, मगर सानिया-शोएब की खबर टीवी के पर्दों पर ज़्यादा ज़रूरी बनी रही....खैर, धोनी की शादी पर लौटते हैं.... ज़ी न्यूज़(इसी के एक छोटे-से हिस्से में मैं भी नौकरी करता हूं...) भी बाक़ी चैनलों की तरह शादी के मंडप से कोसों दूर कैमरा टिकाए इंतज़ार में था कि कब क्या ब्रेकिंग न्यूज़ मिल जाए......देहरादून में हमारे रणबांकुरे साथी और नोएडा के न्यूज़रूम में हम....देहरादून से नोएडा सिग्नल पर मिल रहे वीडियो में कोई भी गाड़ी दिखती तो लगता ये साक्षी होगी, ये साक्षी की अम्मा होगी...और न जाने क्या-क्या....इतनी बारीकी से तो मैंने कभी किसी शादी में हिस्सा नहीं लिया....
खैर, हमारी एक रिपोर्टर ने तो उस घोड़ी का 'जायज़ा' ले लिया जिस पर धोनी सवार होने वाले थे....इतना उत्साह था रिपोर्टर में कि दर्शक अपने भोलेपन में ये तक समझ लें कि धोनी की शादी इसी घोड़ी से हो रही है! और तो और, हमारी एक एंकर ने शादी पर विशेष बुलेटिन के लिए खास तौर पर एक लाल रंग का लहंगा पहन लिया था ...ऐसा लग रहा था कि वहां देहरादून में बारात निकलेगी और यहां हम नाच उठेंगे...
सबसे मज़ेदार था पसीने से लथपथ घोड़ीवाले का 'एक्सक्लूज़िव' इंटरव्यू जो हर चैनल पर चल रहा था....घोड़ीवाला ही मीडियावालों के लिए सबसे विश्वस्त सूत्र था कि धोनी ने क्या पहना, भज्जी ने कितना नाचा और खाने में क्या-क्या था वगैरह-वगैरह....बेचारा घोड़ीवाला इतने सारे कैमरे एक साथ अपने मुंह पर देखकर राहत की सांस ज़रूर ले रहा होगा कि उसके सामने उससे भी 'बेचारे' कितने लोग हैं...
एनडीटीवी के रवीश कुमार ने अपने ब्लॉग पर पहले ही लिख दिया है कि उन्हें आदर्शवादी होकर टीवी के गिरते स्तर पर मर्सिया पढ़ने वाला पत्रकार न समझा जाए....नहीं समझेंगे जी, बस कुछ सलाह और दे दें ताकि आने वाले समय में शादियों की कवरेज में पत्रकारों को टीवी पर मंडप बनाने में और आसानी हो जाए.... सलाह नंबर एक... हो सकता है कि मीडिया चैनल कुछ बड़ी हस्तियों के शादी के ऑर्डर अभी से ही बुक कर लें....जैसे, राहुल गांधी, युवराज सिंह, भज्जी और 'प्रिंस' (गड्ढे में गिरने वाला महान बालक)....फिर इन्हीं चैनलों के ज़िम्मे कैटरिंग का सारा ज़िम्मा हो...पत्तलें बांटने से लेकर पत्तले उठाने तक का...शॉट्स की दिक्कत ही नहीं आएगी साहब...बड़े-बड़े एंकर बड़े-बड़े लोगों की पत्तले उठाएं...वाह! देश की सबसे बड़ी शादी....सबसे बड़ी कवरेज.....सबसे बड़ा पंडाल....हम सबसे बड़े युग में जी रहे हैं....वाह!
सलाह नं दो... शादी के सारे छोटे-बड़े काम छोटे-बड़े चैनल्स आपस में बांट लें...मसलन, पंडित जी को लाने-ले जाने का ज़िम्मा किसी एक चैनल को.....जनवासे (जहां बारात ठहरती है) का इंतज़ाम किसी और चैनल को....न्योता (वो लिफाफा या तहफा जो शादी में आने वाले मेहमान लेकर आते हैं) लिखने का काम किसी और चैनल को...हां, मंगल गीत वगैरह गाने का काम किसी एफएम चैनल को भी सौंपा जा सकता है.....
मेरी बड़ी दीदी की शादी हुई थी तो दस-पंद्रह दिन बाद शादी की कैसेट बनकर आई थी...अलग-अलग फिल्मी गानों और पहाड़-समुंदर वाले लोकेशन्स पर उड़-उड़कर दीदी और जीजाजी की तस्वीरें आती थीं और हम रोमांचित होते थे....मैं दसवीं में पढ़ता था तब....अब एमए पास हूं...नौकरी भी करने लगा हूं...मगर, काम वही शादी के वीडियो बनाने का ही रहा...देहरादून से दूर जहां ये शादी हो रही थी, दूर-दूर तक मीडिया के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी....कैमरे पर भूख-प्यास से बेहाल रिपोर्टर ऐसे जंगल में खड़े लग रहे थे कि दंतेवाड़ा से कवरेज कर रहे हों...फिर भी कवरेज किए जा रहे थे...कोई चैनल बता रहा था कि धोनी ने गोल्डन शेरवानी पहनी थी, किसी ने कहा भूरी शेरवानी पहनी थी...सबको रतौंधी हो गई थी...जिसे जो दिखा, अपने-अपने चैनल को बता दिया...देश अलग-अलग शेरवानी में धोनी की शादी देख रहा था...जैसे धोनी धोनी न रहे हों, धोनी शिव का अवतार हो गए हों....देहरादून की पहाड़ियां कैलाश हों और साक्षी साक्षात पार्वती....मीडिया वाले भूत-बेताल बनकर नाच रहे थे और कोई खाने तक को नहीं पूछ रहा था....
खाने से एक और खबर याद आई जो इस दिन हल्के में कहीं-कहीं चल रही थी....हमारे प्रधानमंत्री 3 जुलाई को आईआईटी कानपुर गए थे तो उनके खाने में 26 व्यंजनों में मिलावट पाई गई थी ! ऐसे-ऐसे ज़हरीले केमिकल पाए गए कि मुझे नाम ही समझ नहीं आ रहे थे....मगर, प्रधानमंत्री की किसी को फिक्र नहीं थी.....अजी, इस देश में खाने में मिलावट कोई खबर है क्या....पीएम ने पहली बार खाया तो क्या हो गया...धोनी रोज़-रोज़ थोड़े ही शादी करेगा....मीडिया को नहीं बुलाया, न सही....जाना तो ज़रूरी है...बिन बुलाए पहुंचने का मजा ही कुछ और है...
निखिल आनंद गिरि
(फोटो : बीबीसी से साभार)

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