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Sunday, August 09, 2009

सोना हुआ रे बड़ा महंगा....


सोने के भाव एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं क्योंकि विश्व बाजार में इसके
भाव चार अंकों में पहुंचने जा रहे हैं। इस समय विश्व बाजार में सोने के
भाव 950 डालर प्रति औस (31.100 ग्राम) के आसपास चल रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व गत वर्ष मार्च में विश्व बाजार में सोने के
भाव 1000 डालर का स्तर पार करके 1034 डालर प्रति औंस का रिकार्ड स्तर छू
चुके हैं।
हालांकि हाल के कुछ महीनों में विश्व बाजार में सोने की मांग कुछ कमी आई
है और भारत में भी इसका आयात कम हुआ है लेकिन इसके बावजूद विश्व बाजार
में सोने के भाव बढ़ रहे है।
सोने में तेजी का कारण निवेशकों की दिलचस्पी है। इसके अलावा विश्व में
सोने के उत्पादन में भी कमी आई है और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी होना भी
है।
आस्ट्रेलिया का विश्व में सोने के उत्पादन में तीसरा स्थान है लेकिन गत
वर्ष वहां पर उत्पादन में कमी आई है। वर्ष 2008 में आस्ट्रेलिया में सोने
का उत्पादन 219 टन हुआ था जो पिछले 20 वर्षों में सबसे कम है। वर्ष 2007
में वहां पर 248 टन का उत्पादन हुआ था। वहां पर न केवल सोने के उत्पादन
में ही कमी आई है अपितु लागत भी बढ़ गई है क्योंकि खान पुरानी होने के
कारण काफी गहराई पर जाकर खनन करना पड़ रहा है और अयस्क की क्वालिटी भी
बेहतर नहीं है। अयस्क में सोने की मात्रा कम होती जा रही है।
सोने के उत्पादन में पहला स्थान चीन और दूसरा स्थान दक्षिणी अफ्रीका का है।
अमेरिका अर्थ-व्यवस्था की स्थिति, कच्चे तेल के मूल्य, उत्पादन लागत और
घटते उत्पादन लागत को देखते हुए विश्व बाजार में सोने के भाव बढ़ना
स्वाभाविक ही है।

भारत की स्थिति

विश्व बाजार में सोने के भाव बढ़ने का असर भारतीय बाजारों पर भी तेजी का आ
रहा है लेकिन तुलनात्मक कम। इसका कारण रुपए की तुलना में डालर का कमजोर होना
है।
विश्व बाजार में भारत सोने की खरीद कम कर रहा है और इस वर्ष की पहली
तिमाही में सोने का आयात 83 प्रतिशत लुढ़क कर केवल 17.7 टन ही रह गया है।
गत वर्ष इसी अवधि में 107.2 टन सोने का आयात किया गया था।
इसका अर्थ यह नहीं है कि देश में सोने की मांग कम हो गई है। वास्तव में
सोने की मांग में हर वर्ष बढ़ोतरी ही हो रही है लेकिन इसकी पूर्ति पुराने
सोने की सप्लाई से हो रही है। इसके अतिरिक्त जिन लोगों ने निवेश के लिए
जेवर के बजाए ठोस सोने यानि बिस्कुट के रुप में खरीद की है वे भी मुनाफा
वसूली के लिए बाजार में इसकी बिकवाली करते रहते हैं। इससे आयात में कमी
के बावजूद घरेलू बाजार में सोने की आपूर्ति बराबर बनी रहती है।
जहां भारत के सोने के आयात में कमी आई है चीन का सोने का आयात कुछ बढ़ा है।

राजेश शर्मा

Sunday, February 22, 2009

क्या है सोने की तेजी का गणित: भाव फिर आएंगे नीचे

भाव फिर आएंगे नीचे
सोने के भाव एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। पिछले 15-20 दिनों से भाव रोज नई बुलंदी छू रहे हैं। पहले 14000 रुपए प्रति 10 ग्राम का स्तर पार होने के कयास लगाए, फिर 15,000 रुपए के और 16,000 रुपए का स्तर छूने की बात की जा रही है।

क्या है सोने की इस तेजी का गणित और क्या सोने अब मंदा नहीं होगा?

ये दो ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर हर कोई जानना चाहता है। पहले सोने के तेजी के कारण की बात करें।

गत वर्ष तक सोने के भाव में तेजी का सम्बंध कच्चे तेल के भाव के साथ होता था। गत वर्ष मार्च में सोने के भाव 1034 डालर (प्रति औंस) के रिकार्ड के स्तर पर पहुंचा था तो कच्चे तेल के भाव 100 डालर प्रति बैरल के आसपास घूम रहे थे।
लेकिन अब कच्चे तेल के भाव गिर कर 40 डालर से नीचे आ गए हैं लेकिन विश्व बाजार में सोने के भाव फिर 1000 डालर का स्तर छूने को तैयार हैं।
इस प्रकार सोने की तेजी को कच्चे तेल के भाव के साथ चला वर्षों पुराना सम्बंध अब टूट चुका है।

सोने के प्रति भारतीयों को लगाव किसी से छिपा नहीं है। सदियों से निवेश को सबसे बेहतर साधन रहा है। विवाह आदि की रौनक इसके बिना होती ही नहीं है। लेकिन पिछले कुछ माह से भारत में सोने का आयात लगातार कम होता जा रहा है। इस प्रकार अब यह तेजी का यह सम्बंध भी समाप्त हो चुका है।

इस समय सोने में तेजी का प्रमुख और एकमात्र कारण अमेरिकी अर्थ-व्यवस्था और विश्व मुद्रा बाजार में डालर की स्थिति डांवाडोल होना है। विदेशों में लोग डालर की बजाए सोने में निवेश कर रहे हैं। तेजी का दूसरा कारण सटोरियों की लेवाली है।
इन दोनों ही कारणों से सोने के भाव बढ़ रहे हैं। ऐसे में जैसे ही अमेरिकी अर्थ-व्यवस्था में सुधार होगा सोने के भाव में गिरावट आएगी।

इतिहास बताता है कि सोने के भाव में उतार चढ़ाव आते ही रहते हैं। विश्व बाजार में 1980 में सोने के भाव 850 डालर प्रति औंस का स्तर बना गए थे लेकिन उसके बाद गिर कर 250 डालर पर आ गए थे। उसके बाद सोने के भाव बढ़ कर 750 डालर पर पहुंचे लेकिन फिर गिर कर 550 डालर पर गए।

मंदी-तेजी के इस खेल में गत कुछ वर्ष पूर्व विश्व बाजार में सोने के भाव दोबारा 850 डालर पर पहुंचे थे और गत वर्ष मार्च में 1034 डालर के स्तर को छू गए थे।
उसके बाद सोने के भाव गिर कर 850 डालर तक आ गए थे लेकिन अब दोबारा भाव में तेजी आ रही है। अभी तक भाव 1000 डालर से नीचे हैं लेकिन जब तक यह लेख आप तक पहुंचेगा, संभव में 1000 डालर प्रति औसं (31.100 ग्राम) से ऊपर चले जाएं। लेकिन यह तेजी अधिक समय टिकने वाली नहीं है। जल्दी ही सोने के भाव गिरेंगे लेकिन कितने यह कहा नहीं जा सकता है।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सोना अपनी चमक खो देगा, सोने की चमक बरकरार रहेगी। गिरने के बाद भाव फिर बढ़ेंगे, ठीक वैसे ही आग में तपने के बाद सोने में और चमक आ जाती है।

राजेश शर्मा