Sunday, January 25, 2009

चीनी के भाव कम कर सकते हैं मिठास...

सूचना तंत्र में आई क्रांति के बाद अंग्रेजी में कृषि व अन्य जिंसो की जानकारी देने वाली अनेक साईट/ब्लाग मिल जाएंगे लेकिन हिन्दी में इस जानकारी की कमी अभी अखरती है। बैठक पर हम आज से इसी के तहत ये विशेष स्तंभ शुरू कर रहे हैं...हमारा प्रयास रहेगा कि पाठकों (जिनमें किसान,विद्यार्थी, व्यापारी व निवेशक शामिल हैं)को कृषि व अन्य जिंसों के देश व विदेश में उत्पादन, आयात, निर्यात, भाव चक्र, भविष्य के रुझान के बारे में विस्तृत और ठोस व विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराई जाए। फ़िलहाल, इस स्तंभ के नियमित लेखक होंगे अनुभवी पत्रकार राजेश शर्मा...

राजेश शर्मा : संक्षिप्त परिचय


राजेश तीन दशकों से पत्रकारिता में हैं...
वर्ष 1976 से नैशनल न्यूज सर्विस (एनएनएस) आर्थिक पत्रकारिता में, वर्ष 1982 में यूएनआई की हिन्दी सेवा-यूनीवार्ता-में आथिर्क डेस्क पर कार्य। बाद में आर्थिक समाचार पत्र व्यापार भारती में समाचार सम्पादक का पद संभाला।
अप्रैल 1987 में मुंबई से जन्मभूमि समाचार पत्र समूह के दिल्ली कार्यालय में संवाददाता। समूह के विभिन्न पत्रों जिनमें व्यापार गुजराती व हिन्दी, राजकोट से फूलछाब, भुज से कच्छमित्र शामिल हैं को समाचार प्रेषण का कार्य। कुछ समय के लिए संसद की कार्यवाही व समाचार संकलन का कार्य किया।
अप्रैल 2000 से स्वतंत्र पत्रकारिता में। इस समय दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी दैनिक अमन व्यापार, भीलवाड़ा से प्रकाशित टैक्सटाईल वल्र्ड, वेबसाईट इंडिया स्टैट डॉट काम, एक विदेशी समाचार एजेंसी आदि के लिए कार्यरत
ईमेल: rajeshsharma1953@gmail.com
चीनी के उत्पादन, बकाया स्टॉक और खपत को देखते हुए आगामी महीनों में उपभोक्ता के लिए चीनी के भाव कड़ुवाहट घोल सकते हैं। बाजार में खुदरा में चीनी अब 23 रुपए प्रति किलो का स्तर छू चुकी है और जल्दी ही 25 रुपए पर पहुंचने के कयास लगाए जा रहे हैं। चीनी में तेज़ी का कारण उत्पादन, बकाया स्टॉक और खपत का गणित है। अनेक वर्ष की उपलब्धता खपत की तुलना में काफी अधिक रही, लेकिन इस वर्ष इसमें असंतुलन की आशंका बन रही है।

चीनी वर्ष 2008-09 (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान देश में चीनी का उत्पादन 180 लाख टन होने का लगाया जा रहा है। हालांकि आरंभ में सरकार का कहना था कि उत्पादन 220 लाख टन होगा लेकिन महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक आदि में गन्ने का उत्पादन व रिकवरी की मात्रा देखते हुए सरकार ने इसे घटा कर 180 लाख टन कर दिया है। गत वर्ष उत्पादन 264 लाख टन था। इससे पूर्व वर्ष यानि 2006-07 में उत्पादन 283.28 लाख टन था।
पिछले बकाया स्टॉक के बारे में सरकार का कहना है यह 105 लाख टन है। बकाया स्टॉक और 180 लाख टन के उत्पादन को मिलाकर चालू वर्ष में चीनी की उपलब्धता 285 लाख टन हो जाएगी। दूसरी ओर, आंतरिक खपत का अनुमान 230 लाख टन है। मिलों को पूर्व में एडवांस लाईसेंस के तहत आयात की गई कच्ची चीनी के बदले लगभग 8 लाख टन का निर्यात भी करना है। इस प्रकार कुल खपत 238 लाख टन हो जाएगी। इसे चालू वर्ष के अंत में केवल 47 लाख टन चीनी का स्टॉक बचेगा। यह स्टॉक कठिनता से केवल ढाई महीने की चीनी की मांग को पूरा कर पाएगा।

दूसरा पहलू
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी। जानकारों का कहना है कि वास्तव में चीनी मिलों के पास एक अक्टूबर को 105 लाख टन चीनी का स्टॉक नहीं था(सरकारी अधिकारी भी इस विषय में छानबीन कर रहे हैं)। जानकारों के अनुसार बकाया स्टॉक केवल 81लाख टन था। इस गणित के अनुसार 180 लाख टन जमा 81 लाख टन कुल उपलब्धता 261 लाख टन ही होगी जबकि कुल खपत का अनुमान 238 लाख टन का है। इस प्रकार चालू वर्ष के अंत में बकाया स्टॉक केवल 21 लाख टन ही बचेगा जो एक माह की आवश्यकता को ही पूरा कर पाएगा। इस कमी को पूरा करने के लिए आयात का सहारा लेना पड़ेगा लेकिन विश्व बाजार में भी चीनी का उत्पादन कम होने के कारण तेजी का माहौल बना हुआ है।
उल्लेखनीय है कि चीनी उत्पादन में भारत का स्थान दूसरा है। पहले स्थान पर ब्राजील है।
यही गणित आगामी महीनों में चीनी में तेजी कारण बनेगा और त्यौहारी सीजन में भाव बढ़ने से उपभोक्ता के लिए चीनी की मिठास गायब हो सकती है।

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6 बैठकबाजों का कहना है :

Udan Tashtari का कहना है कि -

अच्छा विश्लेषण.

संगीता पुरी का कहना है कि -

अच्‍छी जानकारी दी ....आभार।

आलोक सिंह "साहिल" का कहना है कि -

beahatrin vishleshan.
swagat hai aapka sir ji
ALOK SINGH "SAHIL"

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

मैंने अपने स्कूल में कभी भी इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया....मगर अजय जी को पढकर अच्छा लगा....शायद अब मेरी रुचि जग जाये....
निखिल

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

माफ करें,
राजेश शर्मा जी को अजय लिख गया..
निखिल

sumit का कहना है कि -

चीनी के बारे मे आपका विश्लेषण बहुत अच्छा लगा।

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