Monday, July 12, 2010

इंसान तो इंसान जानवर भी हो गए ज्योतिषी !

आप एक व्यक्ति को देख रहे हैं, यह व्यक्ति कमर से आधा झुका हुआ है । आप कयास लगाते हैं कि या तो अब वह बैठने वाला है, या तो सीधा खडा होने वाला है! लेकिन वह आगे कोई भी हरकत नहीं करता, वैसा ही आधा झुका हुआ रहता है। इसे ज्योतिषी कहते है। थोडी ही देर बाद उसे आस-पास कुर्सी नजर आती है तो वह बैठ जाता है और कहता है 'मै बस! बैठने ही वाला था' उसे सडक दिखाई देती है तो सीधा हो कर चलना शुरु कर देता है। कहता है 'मै बस..जाने ही वाला था' उसे नदी या तालाब दिखाई देता है, तो सीधे उसमें छ्लांग लगा कर कहता है - 'मैं नहाने की ही सोच रहा था' इस तरह से यह ज्योतिषी चौतरफा देखते हुए सबसे नजदीकी तत्व के साथ सांठ-गांठ बना लेता है। मेरे कहने का मतलब साफ है, ज्योतिषियों की भविष्यवाणी अधर में लटकी होती है ।'होने' से या ' नहीं होने' से ज्यादा होने और न होने की 'संभावना' पर विशेष जोर दिया जाता है। उनकी भविष्यवाणी के मुताबिक घटित होता ही है! 'संभावना' का बखूबी इस्तेमाल जो किया होता है।
मुझे याद है...कुछ ही साल पहले मैंने एक चैनल पर प्रख्यात ज्योतिषी बेजान दारुवाला का प्रोग्राम देखा था। तब ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन की होने वाली या ना होने वाली शादी की चर्चा जोरों पर थी! समाज का एक वर्ग मान कर चल रहा था कि यह शादी अवश्य होगी और दूसरा वर्ग मान रहा था कि यह शादी नहीं हो सकती । चैनलों को बदलते हुए मैं इस चैनल पर रुक गई...बेजान दारुवाला बताने वाले थे कि यह शादी होगी या नही। टी.वी एंकर ने उनसे यही सवाल सीधे तरीके से पूछा। ज्योतिषी बेजान दारुवाला पहले इधर-उधर की बातें करने लगे। फिर ब्रेक तो बीच में आना ही आना था, हम भी कहीं नहीं गए... फिर बेजान दारुवाला हंसते हुए छोटे परदे पर आए...बोले "अभिषेक और ऐश्वर्या राय की शादी की संभावना क्षीण है... अगर शादी हुई तो दिसम्बर के आसपास हो सकती है!"... भविष्यवाणी हमने भी सुन ली और उस समय वह चैनल लगा कर बैठे अन्य लोगों ने भी सुन ली। यह भी दिसम्बर महीना था, मतलब अगर शादी हुई तो एक साल बाद होने वाली थी। तब तक खैर! हमें इंतजार ही करना था.... लेकिन इंतजार ज्यादा नहीं करना पडा... दो महीने बाद ही फरवरी में अभिषेक और ऐश्वर्या की शादी हो गई!
अब ज्योतिषी बेजान दारूवाला ने क्या भविष्यवाणी की थी? ऐसी भविष्यवाणी हम या आप भी कर सकते थे... शादी होने की संभावना क्षीण होने का मतलब ...'हां' भी हो सकता है और 'ना' भी हो सकता है!.. घटना घटित हुई तो भी हमारी भविष्यडवाणी सही कहलाएगी और नहीं हुई तो भी हम सही ही कहलाएंगे। आपने भी ऐसे भविष्यवाणियां नोट की होंगी!
किसी ने भी डंके के जोर पर..अमेरिका के ट्विन टावर पर हवाई हमला, अक्षरधाम पर हमला, मुंबई में बम-ब्लास्ट या ट्रेन या हवाई हादसों की भविष्यवाणी की नहीं थी!... क्यों?
अब 'पॉल' नामक ऑक्टोपस और' मनी' नामक तोता भविष्यवाणियां कर रहे हैं... कम से कम वे 'यस' या 'नो' में जवाब तो दे रहे है...संभावित ज्योतिषियों की तरह 'संभावना' की बात तो नहीं कर रहे... आप क्या कहना चाहेंगे?.

डॉ अरुणा कपूर

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

8 बैठकबाजों का कहना है :

विश्व दीपक का कहना है कि -

अरूणा जी,
आलेख के अंतिम पैराग्राफ को छोड़ दें तो यह निष्कर्ष निकलता है कि आप ज्योतिषों को नहीं मानतीं क्योंकि वे ५०-५० का गेम खेलते हैं. यानि कि वे खुलकर नहीं बताते कि कुछ होगा या नहीं।

लेकिन अंतिम पैराग्राफ में आपने "ऑक्टोपस" की भविष्याणी का समर्थन किया है, क्योंकि वे खुलकर हाँ या ना बता देते हैं। और अगर कल के मैच का रिजल्ट देखा जाए तो इस "पॉल" की सारी भाविष्याणियाँ सही हुई हैं... मतलब कि ये तो "खरे" ज्योतिष निकले।

अब मैं थोड़ा कन्फ़्युज्ड हो गया हूँ कि आप इस लेख से कहना क्या चाहती हैं.. मतलब कि हमें ज्योतिषों पर विश्वास करना चाहिए या नहीं... या फिर हमें "इंसानी" ज्योतिषों पर विश्वास नहीं करना चाहिए लेकिन अगर "जानवर" ज्योतिष हो तो हम उनकी बात मान सकते हैं।

इस लेख के अंतिम वाक्यों ने लेख की बाकी बातों को उलझा-सा दिया है। इसलिए मैं कुछ भी कहने की हालत में नहीं पहुँच पा रहा हूँ। मेरे संदेह का निवारण करें।

-विश्व दीपक

संगीता पुरी का कहना है कि -

किसी प्रकार की भविष्‍यवाणी करने के कई आधार होते हैं .. यह व्‍यक्ति विशेष पर निर्भर है कि वह किस आधार पर काम कर रहा है .. एक बीज को देखकर किसान उसके भविष्‍य की यानि की पेड , पत्‍ते , फूल और फल की रूपरेखा खींचता है .. वो भी भविष्‍य का आकलन ही है .. एक बच्‍चे के चरित्र को देखते हुए उसके जीवन की उपलब्धियों को समझने में मदद मिलती है .. सांख्यिकविद तरह तरह के आंकडों को लकर भविष्‍य के भिन्‍न भिन्‍न क्षेत्रों का अनुमान लगाते हैं .. कुछ तंत्र मंत्र की साधना से भविष्‍य को जानने का दावा करते हैं .. हम जैसे ज्‍योतिषी बच्‍चे के जन्‍म के समय आसमान में मौजूद ग्रहों की स्थिति से बच्‍चे के चरित्र और उसकी जीवनयात्रा का अनुमान लगाते हैं .. इसके साथ कुछ महत्‍वपूर्ण घटनाओं का आसमान के ग्रहों से तालमेल बिठाते हुए आने वाली घटनाओं का आकलन करते हैं .. पर चाहे जो भी आधार हो .. कोई सर्वज्ञ नहीं होता .. वैसे भविष्‍य का आकलन करने में गुणात्‍मक पहलू तक जाने में बहुत कम अपवाद होते हैं .. पर जैसे ही हम संख्‍यात्‍मक पहलू को लेने लगते हैं .. हमें निराशा मिलने लगती है .. अब तोते या ऑक्‍टोपस द्वारा की जानेवाली शत प्रतिशत सटीक भविष्‍यवाणियों की जहां तक बात है .. वहां कोई आधार नहीं .. इसलिए इसके कारण को ढूंढ पाना किसी के वश का नहीं .. जबतक प्रकृति की इच्‍छा होगी .. उसकी भविष्‍यवाणियां सही होती रहेगी !!

Deepali Sangwan का कहना है कि -

kal aaj tak par maine bhi yah sab dekha, ek taraf tota aur ek taraf octopas baba, khair yeh to varson pruana drama hai..t.v. Channels par roz hoti hai bhavishyavaani, hazaaron log dekhte hain, andhvishwas kehte bhi hain fir bhi isi mein padte bhi hain, kamaal hai na..
Love them or hate them
but u cant ignore them..

Kal khud ek jyotishi baithe the jo keh rahe the ki is par shodh karo isja vyaparikaran mat karo.. Jyotish in sab se alag cheez hai, jyotish ne yeh tak bataya hai ki prithvi kitne varsh pehle bani jo ki vigyaan aaj tak nahi bata paya, lekin still jyotish ke naam par hone wale yeh drame band kiye jane chahiye, koi bhi cheez jab paise se jud jati hai to pure nahi rehti.

डा. अरुणा कपूर. का कहना है कि -

विश्वदीपक जी!...ओक्टोपस या तोते की भविष्यवाणी पर विश्वास करने का सवाल ही नहीं पैदा होता!... सभी प्राणियों में मनुष्य ही सर्व श्रेष्ठ प्राणी है!... अगर मनुष्य ही सटिक भविष्यवाणी करने में असमर्थ है तो दूसरे प्राणियों को इस योग्य मानना हास्यास्पद है!... हा! यह है कि ऑक्टोपस या तोता ' यस' या 'नो' में जवाब दे कर पूछे गए सवाल को उलझा नहीं रहे!... ज्योतिषी भी मक्कमता से ' हा' या 'ना' में जवाब दे सकतें है!

मै ज्योतिषशास्त्र के खिलाफ नहीं हूं...ज्योतिष संबंधित ग्रंथ मेरे लिये पूज्य है!...बल्कि मै चाह्ती हूं कि यह विद्या पुरातन ग्रंथो तक ही सीमित न रहे...इस विषयमें और भी नए नए आविष्कार सामने आए!... सटिक भविष्यवाणियां कर के ज्योतिषी समाज का और विश्व का भी भला कर सकतें है!

संगीता जी!...आप तो जानती ही है कि ज्योतिषशास्त्र एक गूढ शास्त्र है!... लेकिन भविष्यवाणी महाभारत में युधिष्ठिर द्वारा कहे गए' नरो वा...कुंजरो वा' शब्दों जैसी तो नहीं होनी चाहिए!...एक ज्योतिषी से हम १०० प्रतिशत न सही... ७०/८० प्रतिशत की तो अपेक्षा रख ही सकते है!... और फिर भविष्यवाणी गलत भी हुई तो क्या हुआ?...कैल्क्युलेशन या जांच में गलति तो एक इंजीनियर, डॉक्टर, सी.ए. या वकील भी कर सकता है!...तो मै यही कहूंगी ज्योतिषी ' आधे-अधुरे जवाब दे कर अपनी बात सही साबित करने के झमेले में न पडें!'

दिपाली जी!...सही कहा आपने... ज्योतिष्यशात्र का आधार गणित भी है!...हमारे पंचांग ज्योतिर्विदो द्वारा ही बनाए गए है, जो आकाशिय ग्रहों की सही स्थिति बताते है!!..प्रूथ्वी की उत्पत्ति का भी सही समय बताते है!

डा. अरुणा कपूर. का कहना है कि -

विश्वदीपक जी!...ओक्टोपस या तोते की भविष्यवाणी पर विश्वास करने का सवाल ही नहीं पैदा होता!... सभी प्राणियों में मनुष्य ही सर्व श्रेष्ठ प्राणी है!... अगर मनुष्य ही सटिक भविष्यवाणी करने में असमर्थ है तो दूसरे प्राणियों को इस योग्य मानना हास्यास्पद है!... हा! यह है कि ऑक्टोपस या तोता ' यस' या 'नो' में जवाब दे कर पूछे गए सवाल को उलझा नहीं रहे!... ज्योतिषी भी मक्कमता से ' हा' या 'ना' में जवाब दे सकतें है!

मै ज्योतिषशास्त्र के खिलाफ नहीं हूं...ज्योतिष संबंधित ग्रंथ मेरे लिये पूज्य है!...बल्कि मै चाह्ती हूं कि यह विद्या पुरातन ग्रंथो तक ही सीमित न रहे...इस विषयमें और भी नए नए आविष्कार सामने आए!... सटिक भविष्यवाणियां कर के ज्योतिषी समाज का और विश्व का भी भला कर सकतें है!

संगीता जी!...आप तो जानती ही है कि ज्योतिषशास्त्र एक गूढ शास्त्र है!... लेकिन भविष्यवाणी महाभारत में युधिष्ठिर द्वारा कहे गए' नरो वा...कुंजरो वा' शब्दों जैसी तो नहीं होनी चाहिए!...एक ज्योतिषी से हम १०० प्रतिशत न सही... ७०/८० प्रतिशत की तो अपेक्षा रख ही सकते है!... और फिर भविष्यवाणी गलत भी हुई तो क्या हुआ?...कैल्क्युलेशन या जांच में गलति तो एक इंजीनियर, डॉक्टर, सी.ए. या वकील भी कर सकता है!...तो मै यही कहूंगी ज्योतिषी ' आधे-अधुरे जवाब दे कर अपनी बात सही साबित करने के झमेले में न पडें!'

दिपाली जी!...सही कहा आपने... ज्योतिष्यशात्र का आधार गणित भी है!...हमारे पंचांग ज्योतिर्विदो द्वारा ही बनाए गए है, जो आकाशिय ग्रहों की सही स्थिति बताते है!!..प्रूथ्वी की उत्पत्ति का भी सही समय बताते है!

डा. अरुणा कपूर. का कहना है कि -

विश्वदीपक जी!...ओक्टोपस या तोते की भविष्यवाणी पर विश्वास करने का सवाल ही नहीं पैदा होता!... सभी प्राणियों में मनुष्य ही सर्व श्रेष्ठ प्राणी है!... अगर मनुष्य ही सटिक भविष्यवाणी करने में असमर्थ है तो दूसरे प्राणियों को इस योग्य मानना हास्यास्पद है!... हा! यह है कि ऑक्टोपस या तोता ' यस' या 'नो' में जवाब दे कर पूछे गए सवाल को उलझा नहीं रहे!... ज्योतिषी भी मक्कमता से ' हा' या 'ना' में जवाब दे सकतें है!

मै ज्योतिषशास्त्र के खिलाफ नहीं हूं...ज्योतिष संबंधित ग्रंथ मेरे लिये पूज्य है!...बल्कि मै चाह्ती हूं कि यह विद्या पुरातन ग्रंथो तक ही सीमित न रहे...इस विषयमें और भी नए नए आविष्कार सामने आए!... सटिक भविष्यवाणियां कर के ज्योतिषी समाज का और विश्व का भी भला कर सकतें है!

संगीता जी!...आप तो जानती ही है कि ज्योतिषशास्त्र एक गूढ शास्त्र है!... लेकिन भविष्यवाणी महाभारत में युधिष्ठिर द्वारा कहे गए' नरो वा...कुंजरो वा' शब्दों जैसी तो नहीं होनी चाहिए!...एक ज्योतिषी से हम १०० प्रतिशत न सही... ७०/८० प्रतिशत की तो अपेक्षा रख ही सकते है!... और फिर भविष्यवाणी गलत भी हुई तो क्या हुआ?...कैल्क्युलेशन या जांच में गलति तो एक इंजीनियर, डॉक्टर, सी.ए. या वकील भी कर सकता है!...तो मै यही कहूंगी ज्योतिषी ' आधे-अधुरे जवाब दे कर अपनी बात सही साबित करने के झमेले में न पडें!'

दिपाली जी!...सही कहा आपने... ज्योतिष्यशात्र का आधार गणित भी है!...हमारे पंचांग ज्योतिर्विदो द्वारा ही बनाए गए है, जो आकाशिय ग्रहों की सही स्थिति बताते है!!..प्रूथ्वी की उत्पत्ति का भी सही समय बताते है!

shanno का कहना है कि -

अरुणा जी...जब ज्योतिष विद्या में अपने को निपुण कहने वाले लोग अगर कुछ इस तरह कहते हैं कि '' इस बात की सम्भावना अधिक है..या हो सकती है '' तो उनकी ज्योतिष कमजोर है..वो खुद श्योर नहीं होते किसी बात के बारे में..लेकिन क्यों कि वह नाम से ज्योतिषी हैं तो अपनी नाक तो रखनी ही है और कुछ न कुछ कन्विंसिंग लहजे में कहना ही है..अटकल पच्चू में कोई बात सही निकल गयी तो उनकी वल्ले-बल्ले..नहीं तो गलत होने पर वो संकरी गली से निकल लेते हैं..आप या हम उनसे झगड़ने तो जायेंगे नहीं..और फिर भी तमाम लोग असफल किस्से जानते हुये भी जान-बूझ कर ज्योतिषियों की हथेली गरम करके अपने बारे में पूछते ही रहते हैं..सोचती हूँ कि अगर ना पूछें तो क्या फरक पड़ेगा..होना तो वही है जो सबकी किस्मत में लिखा होता है..है ना..?

डा. अरुणा कपूर. का कहना है कि -

आपने बिलकुल सही कहा शन्नो जी!..किस्मत में जो लिखा है, वह हो कर ही रहता है..उसे कोई भी नहीं टाल सकता!... धन्यवाद!

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