Monday, April 13, 2009

मधुशाला हाट बिकाय....

विनोद द्विवेदी मध्यप्रदेश के पिछड़े आदिवासी इलाके से ताल्लुक रखते हैं.....बहुत कुछ करने की तमन्ना थी, अब पत्रकारिता में आकर अटक गए........जबलपुर से कैरियर शुरू कर हैदराबाद होते हुए दिल्ली पहुँच गए.....आजकल जी न्यूज़ में कैमरे के आगे ड्यूटी बजाते हैं......हिन्दयुग्म खोल कर देखा तो उन्हें लगा कि इसकी आदत बना लेना ही मुनासिब है.....सो, हमें ये लेख भेज दिया.....बैठक पर आप इनका स्वागत करें..... न्यूज रूम में खबर आयी कि इलाहाबाद में हरिवंश राय बच्चन जी का पुराना मकान बिकने वाला है।
मिट्टी का तन मस्ती का मन....क्षण भर जीवन मेरा परिचय…. बाजार बनती इस दुनिया में आज भी बच्चन जी की पहचान प्रेम के चितेरे के तौर पर है। 1935 में जब से हरिवंश जी मधुशाला लिखी, तब से आज तक प्रेमी इसमें डूबते-उतराते रहे हैं।
कान में शहद की तरह घुल जाती है, मधुशाला। इस सदी की सबसे लोकप्रिय रचना अगर कोई है, तो वो मधुशाला है। सुरा के सहारे डॉ हरिवंश राय बच्चन ने जिंदगी का जो फलसफा बुना था, वो करीब आधी सदी बाद भी आंखों में चमक और लबों पर मुस्कराहट ला देता है। सैकड़ों सालों बाद शायद किसी ने शराब को मधु कहकर इतनी इज्ज़त बख्शी होगी। मधुशाला पढ़ते हुए एक पीढ़ी जवां हुई है, और उस दौर के किस्से सुनते-सुनते कई पीढ़ियों ने यौवन की अंगड़ाई ली है। अब वो मधुशाला बिकने वाली है।
मधुशाला जब छपकर आई, तो इसने लोकप्रियता के सारे पैमाने तोड़ दिए। हरिवंश जी ने इलाहाबाद के मुठ्ठीगंज के जिस मकान में मधुशाला को अपने जेहन से कागज पर उतारा था, उसे बाद में मधुशाला निवास का नाम ही दे दिया।
मेरे शव पर वह रोए, हो जिसके आंसू में हाला
आह भरे वो जो हो सुरभित मदिरा पीकर मतवाला
दें मुझको कांधा वो जिनके पग मद डगमग होते हों
और जलूं उस ठौर जहां पर कभी रही हो मधुशाला
मौत के बाद भी जिस कवि का मन मधुशाला में ही रमता हो क्या उसकी मधुशाला यूं ही उजड़ जाएगी। क्या कोई सूरत नहीं कि इसे कायम रखा जाए ताकि आज भी जब कोई शख्स प्रेम की राह पकड़े तो उसे सीधे बच्चन की मधुशाला तक पहुंचने में कोई मुश्किल ना हो।
अमिताभ जब भी बाबूजी की बात करते हैं, तो उनकी एक बात का जिक्र करना कभी नहीं भूलते- मन का हो अच्छा, ना हो तो और भी अच्छा।
अमिताभ कहां हैं, क्या उन्हें नहीं पता कि उनके बाबूजी की मधुशाला बिक रही है। वो तो बचा ही सकते हैं।
ये तो वो बातें थीं ,जो खबर के तौर पर लिखी गईं, दिल का दूसरा कोना कहता है, कि अगर बिकने से बच भी गई तो क्या....अभी नहीं बिकी थी इतने दिनों तो क्या फर्क पड़ गया....कोई संग्रहालय या पर्यटनस्थल तो थी नहीं....बहुतों को तो पता भी नहीं होगा कि इस घर की अहमियत क्या है, गुजर जाते होंगे लोग आसपास से, अपनी गाड़ी का धुआं इसी घर पर छोड़ते हुए...कोई और देश में होता तो इस मकान को तीर्थ का दर्जा मिला होता....पर ये हिंदोस्तां है, सारे जहां से अच्छा....हम किताब पढ़कर ही खुश हो लें....ऐसे में अगर इस मकान के मालिक,, हरिवंश जी के नाम पर इस मकान से थोड़ी सी लोकप्रियता या थोड़ा ज्यादा पैसा कमाने की सोच रहे हों तो हर्ज क्या है।



विनोद द्विवेदी

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

5 बैठकबाजों का कहना है :

Dr. Smt. ajit gupta का कहना है कि -

समझ नहीं आ रहा इस समाचार पर रोया जाए या हँसा जाए? हम तो आजतक अमिताभ को पितृभक्‍त के नाते ही श्रद्धा करते आए थे अब उनके रहते मकान बिके और संग्रहालय न बने यह तो हास्‍यास्‍पद ही है। आपने इसे खबर बनायी है तो शायद कुछ हो?

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

लेख के लिए धन्यवाद |
इसपर इतनी चिंता क्यों ?
हमने तो निराला की कलम तक बेंची है |
साहित्य का व्यापारीकरण नही देख रहे हो ?

अवनीश तिवारी

तपन शर्मा का कहना है कि -

जानकारी के लिये धन्यवाद.. ऐसी खबरें पता ही नहीं चल पाती हैं.. कितने ही खिलाड़ी और लेखक ऐसे ही समय बिता रहे हैं...या हमें छोड़ कर चले गये हैं.. उनकी और उनकी विरासत की खबरे लेने वाला कोई नहीं

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

यह भारत है...इंग्लैंड में शेक्सपिअर के मकान को संग्रहालय बनाया जा सकता है. भारत में तो नेता को ही इस सम्मान का हकदार समझा जाता है. बच्चन के पाठको से अपील की जाये... मकान की कीमत सब मिल कर चुकाएं और संग्रहालय बना दें. बच्चन के मानस पुत्रों का कोइ फ़र्ज़ नहीं है क्या? अमिताभ यदि खरीदेंगे भी तो वह उनकी तथाकथित संभ्रांतता की क़ैद में अजायबघर बन जायेगा.

manu का कहना है कि -

बेशक जिस जगह पर "मधुशाला"का जन्म हुआ हो व्वो जगह तो उसका रसास्वादन करने वालों के लिए तीर्थ से कम नहीं ......
अब तीर्थ स्थान को बिकते हुआ पढना सुनना ही मन में बैचेनी पैदा कर रहा है.....
पता नहीं किस संग दिली से बेचा जायेगा ये तीर्थ ...और कैसे लोग भीड़ बनाकर देख पायेंगे ये नीलामी..

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)