Thursday, January 29, 2009

पद्मश्री का बनता मजाक...

इसे मजाक नहीं तो और क्या कहेंगे। पद्मश्री वो सम्मान है जो भारतीय नागरिक को उसके क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिये दिया जाता है। हर वर्ष कभी खेल रत्न तो कभी अर्जुन अवार्ड विवादों में घिरे रहे। इस बार भी विवाद कम नहीं है। महाराष्ट्र और कर्नाटक की दो सेनाओं की वजह से इस सम्मान से जुड़े कुछ सवाल थोड़े समय के लिये पीछे चले गये।

कहते हैं कि जरूरत पड़ने पर गधे को भी बाप बनाना पड़ता है। लेकिन राजनीति में हर ओर गधे ही गधे हैं। कांग्रेस सरकार की मदद की समाजवादी पार्टी ने। तो एहसान तो उतारा ही जाना चाहिये। सपा नेता अमर सिंह के बड़े भाई की बहू, यानि ऐश्वर्य राय बच्चन को पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा के साथ ही विवाद ने जन्म ले लिया था। सवाल है कि इस वर्ष ऐश्वर्या राय ने ऐसा क्या काम किया है जो लोगों को नज़र नहीं आ रहा और सरकार देख पा रही है। ऐश्वर्या का कला के क्षेत्र में योगदान उतना ही है जैसा पिछले सालों में था। उसमें कोई बदलाव देखा नहीं गया है।अब सरकार या अमर सिंह कुछ भी कहें लेकिन दाल में कुछ काला तो जरूर है।

अब बात एक और बड़े सवाल की जो पिछले से ज्यादा बड़ा और गम्भीर है। दुनिया जानती है भारत को ओलम्पिक में बॉक्सिंग के खेल में पहली बार पदक मिला। पदक दिलवाने वाले थे विरेंद्र कुमार और अखिल कुमार। पर खेल में पद्मश्री ले गये भज्जी और धोनी। अभिनव बिंद्रा को जरूर पद्म विभूषण दिया गया। लेकिन इन दोनों मुक्केबाजों को कुछ हाथ नहीं लगा। कोई सम्मान नहीं मिला। क्रिकेट के खिलाड़ी जब जीत कर घर लौटते हैं तो उनके स्वागत में सड़कें खाली की जाती हैं। पर इन विजेताओं का समान ही नहीं होता है। कोई पूछे सरकार से कि हरभजन सिंह ने क्या किया है भारत के लिये, कम से कम २००८ के कैलेंडर वर्ष में। मुझे नहीं लगता है कि इन मुक्केबाज़ों से बड़ा योगदान महेंद्र सिंह धोनी या हरभजन सिंह ने किया है। अलबत्ता भज्जी तो नित नये विवाद में फँसे रहे। पहले साइमंड्स के साथ "मंकी" विवाद हो या रावण का भेष धर कर सीता संग रियलिटी शो में नाचना। या फिर शराब का विज्ञापन करना या खुले बाल कर रैम्प पर चलना। इतना सब होने के बाद भी सरकार यदि इसको खेल के प्रति उनका महत्वपूर्ण योगदान समझती है तो मुझे सरकार की आँखों पर पट्टी लगी नजर आ रही है जो क्रिकेट से ऊपर सोच ही नहीं पा रही है। शायद उन्हें क्रिकेट की जगह पैसा दिख रहा है। सानिया नेहवाल मलेशिया से वापस आती हैं तो उनका स्वागत नहीं होता। इससे पहले तो उन्हें वीज़ा के चक्कर काटने पड़ते हैं। यदि इसी तरह बाकी खेलों और खिलाड़ियों को नज़रंदाज़ करने का सिलसिला चलता रहा तो बाकि खेल समाप्त ही हो जायेंगे। यदि सरकार इन खेलों के उत्थान के लिये कुछ नहीं करती तो इन खिलाड़ियों की हौंसला-अफ्ज़ाई तो कर ही सकती है।

पद्मश्री जैसे सम्मान से साथ राजनीति करके सरकार क्या साबित करना चाहती है उसको जवाब देना चाहिये।

तपन शर्मा

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29 बैठकबाजों का कहना है :

प्रभात शारदा का कहना है कि -

Yes, even i too feel bad with the government's stupid decision. But nothing going to be changed sir. This bad film will continue. Nobody is going to answer it and nobody in the government has the time to look such issues. Its all the matter behind the curtains and even the sport ministry wants to enjoy the drama. Because of such things people lost their faith. All are from same pit.

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

ऐश्वर्य राय बच्चन को पद्मश्री दिये जाने की खबर को सुनकर एक ने कहा कि शायद अगला भारत रत्न हिमेश रेशमिया हो मिले।

मुझे अब यह मजाक सच होता दीख रहा है।

इसका दुष्परिणाम यह होने वाला है कि इन अवार्डों की अहमियत घट जायेगी। जनता तो यह समझने ही लगी है। आपने अच्छा समझाया भी है।

mamta का कहना है कि -

बिल्कुल सही लिखा है आपने ।
वैसे भी सरकार के कान पर जूं नही रेंगने वाली ।

Shikha Deepak का कहना है कि -

सही लिखा है। मैं तो आपसे सहमत हूँ। इन सम्मानों की अपनी गरिमा है उनका मान रखना चाहिए।

varsha का कहना है कि -

बिल्कुल सही बात, ऐश्वर्या को पद्मश्री दिए जाने की ख़बर से तो मैं भी हतप्रभ हूँ। और खेल में भी मुक्केबाजों को सम्मान दिया जाना चाहिए था, आख़िर देश की सरकार क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों को बढावा देना चाहती है या नही!!

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" का कहना है कि -

अजी सम्मान न हुए रेवडियां हो गई........

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` का कहना है कि -

जिसकी जितनी पहुँच उसी का नाम आगे आता देखा गया है
खैर, अमिताभ तो कह रहे हैँ कि भगवान की उनके परिवार पर
बहुत कृपा है ये उसीका नतीजा है -

manu का कहना है कि -

" यहाँ शोहरत-परस्ती है हुनर का असल पैमाना,
इन्हीं राहों पे शर्मिन्दा रहा है मुझ से फन मेरा "

और शायद हिमेश रेशमिया के बाद अगला पद्मश्री

" राखी सावंत " को.............
शायद हां .....

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

हिंदी ब्लॉगिंग के क्षेत्र में भी पुरस्कार रखे जा सकते हैं....क्या लगता है...तपन जी ने अच्छे मुद्दे को छू दिया है....

तपन शर्मा का कहना है कि -

इसमें कुछ बातें छूट गई..
कुश्ती में पदक जीतने वाले सुशील कुमार का नाम रह गया...
और हरभजन सिंह ने जो चाँटा मारा था श्रीसंत को और मीडिया ने भुनाया था... उसका जिक्र रह गया... शायद उसी सीन से इम्प्रेस होकर सरकार ने यह "रेवड़ी" बाँटी हो...

manu का कहना है कि -

निखिल जी .ब्लोगिंग ka तो अवार्ड .."विनय जी " को ही मिलेगा ...
आपको या हमें नहीं......
भाई वो अपना विज्ञापन कर कर के फेमस जो हो गए हैं.....????

Dr. Smt. ajit gupta का कहना है कि -

'ऱाजस्‍थान पत्रिका के समाचार के अनुसार श्रीनगर के शॉल निर्यातक हसमत उल्‍ला खान को पदमश्री देने की घोषणा की गयी। म‍ीडियाकमियों ने साक्षात्‍कार के लिए इस दस्‍तकार को खोजा तो असलियत सामने आयी।'
यदि प्रत्‍येक प्रबुद्ध नागरिक इसी प्रकार जागरूक हो जाए तब शायद सरकारों पर नकेल कसे। नहीं तो इन पदकों की भी गरिमा समाप्‍त हो जाएगी।
अजित

neelam का कहना है कि -

मनु जी आपने मज़ाक मे एक नाम लिया है ,राखी का शायद उसके संघर्ष से आप अन्भिग्य हैं

अपने बात मे थोड़ी गरिमा रखिए कुछ भी बोलने को ,आप स्वतन्त्र कदापि नहीं हैं | बात यह हो रही

रही है कि सम्मानों की रेवाड़ियाँ बटना ग़लत है ,उसका समर्थन करिए ,

आलोक सिंह "साहिल" का कहना है कि -

भाई जी,जिसकी लाठी उसकी भैंस....
इसमे कुच्छ भी बहुत आश्चर्य वाली बात नहीं है....
ऐसा ही होता है,
ये सियासत के कुत्ते हैं जिनकी डाल हर बार काली ही होती है,
खैर,ऐश,अमिताभ कि बरी ती आई गयी...
अब तैयार रहिए मनोज तिवारी,संजय दत्त(ए के ५६ से देश क़ी रक्षा करने वाले) और हाँ......बापू क़ी राह पर चलने वाली(कपड़े क़ी बचत ) मल्लिका
शहरावत का नाम तो भूल ही गया...
आलोक सिंह "साहिल"

majid का कहना है कि -

हम आप की बात से काफी सहमत हैं,क्या हो गया हो गया है इन राजनीतिज्ञों को चाहे वो किसी भी दल या पार्टी का हो,इनका राजनीतिज्ञों का स्तर इतना गिर जाएगा बड़े अफसोस की बात है। पहले तो क्षेत्रीय राजनीतिज्ञों के बारे में बाहुबल या कम पढ़े लिखे जैसे या राजनीतिक सलाहितों के सवाल उठते रहे पर अब तो राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिरज्ञों के ऊपर सवाल उठने लगे हैं। अभी हाल ही में हुए मुंबई आतंकी हमलों का मामला ले लीजिए और उससे पहले महाराष्ट्र या दिल्ली बटला हाउस एन्काउन्टर का मामला हो। हर मुद्दे को किस रूप में लेकर राजनीति की गई हम आप बखूबी देख रहे हैं। ऐसे में देश की दशा और दिशा कैसी बनती जा रही है एक बड़ा सवाल बनता जा रहा है।

आलोक सिंह "साहिल" का कहना है कि -

सच कहा माजिद भाई अगर हम सोचने बैठें कि आज के राजनीतिग्यॉं को क्या हो गया है तो पेशानी पर लकीरें और पसीने तो आ जाती हैं पर समझ कुच्छ नहीं आता..........
आलोक सिंह "साहिल"

manu का कहना है कि -

नीलम जी,
एक मामूली सा दर्शक और श्रोता होने के नाते बेहद मामूली सेंस रखता हूँ ...इसी के आधार पर हिमेश और राखी की बात की है...अभिनय और ड्रामे बाजी में...या संगीत और शोर में अन्तर का...हो सकता है के ज्यादा मुझे ना पता हो....पर मुझे लगा के मैं भी वही कह रहा हूँ...जो तपन जी ने कहा है....हो सकता है के कहने का अंदाज अलग हो या हमेशा की तरह उलझा हुआ हो....
फ़िर भी अगर आपको इसमे कुछ ग़लत लगा हो तो मुझे AAPSE माफ़ी मांगने में तनिक भी झिझक नहीं है.......
मेरे कारण किसी संवेदन शील इंसान का मन दुखे तो मेरे लिए शर्म की बात है.....
और नियंत्रक चाहे तो मेरी टिपण्णी हटा सकते हैं......

नटखट बच्चा का कहना है कि -

हमें नही पता राखी आंटी भी पदम् श्री की हक़दार है जी ?कौन सा तीर मारा है जी उन्होंने हाल में ?

नटखट बच्चा का कहना है कि -

वैसे अब अमिताभ अंकल अपने ब्लॉग पे क्या लिखेगे ?

आलोक सिंह "साहिल" का कहना है कि -

पहली बात तो मनु जी,की यह किसी बहस का मुद्दा है ही नहीं...... अपनी बात रखने का हक सभी को है.खैर,वैसे भी यह तो सही है कि जो भी पर्दे पर या क्षितिज पर दिखता है उसने कम से कम कुछ तो किया ही होता है,वैसे भी नीलम जी,मनु जी का ऐसा कोई उद्देश्य रहा होगा ऐसा मैं नहीं सोचता.......कि किसी कि खिंचाई कि जाए.........
नटखट जी,बिल्कुल मज़े कि बात की की है आपने........
अब अंकल अमिताभ लिखेंगे..........
आईं......अजी,ये तो हमारे खानदान की रवायत रही है...अब आप ही देख लीजिए,पहले बाबू जी,फिर उनका अंश यानी कि मैं और अब हमारी बहू...ये तो परंपरा है...जिसका ऐश ने निर्वहन
किया है...वैसे भी अमर सिंह जी मेरे बड़े भाई की तरह हैं,अगर उनकी अगया से मैं उत्तर प्रदेश में अपराध कम करा सकता हूँ तो मेरी बहू अवॉर्ड क्यों नहीं ले सकती.........अब कृपया इस मसले को यहीं ख़त्म कर दीजिए वैसे भी इससे मेरे मार्केट पर बहुत असर नहीं होने वाला........अरे भाई अब मैं उतना जवान नहीं रहा.......
....
....
आलोक सिंह "साहिल"

lalit का कहना है कि -

Dear ..

I read your article regarding "padam shri ka banta majak" really not beyond the truth. it shows only the Governments Stupidity & nothing else with the help of these kind of articles we are able to tell the truth
to the people. it is people's govt & they are able to throw this kind of govt from the roots.

so pl carry on & write like that articles at time to time & contribute to this great nation.

Kyoki Kalam kee taakat sabse badi hoti hai...........

Jai Hind.......
Sharma Lalit

sumit का कहना है कि -

वैसे ऐश्वर्या राय का नाम सुनकर तो मुझे भी झटका लगा था,
पर हम बहस करने और अपने गुस्से को जाहिर करने के सिवा कुछ कर भी नही सकते

सुमित भारद्वाज

आलोक सिंह "साहिल" का कहना है कि -

are sumit bhai,agar itna karne ka wakt bhi nikal pate hain to ye hamari khushnasibi hai.....
ALOK SINGH "SAHIL"

sumit का कहना है कि -
This comment has been removed by the author.
sumit का कहना है कि -

अलोक भाई
कल पेपर समाप्त हो गये, अब कुछ समय के लिए आजाद हूँ किताबो से
आप बताइऐ आप कैसे हो?

sumit का कहना है कि -

अमित(अमिताभ बच्चन) जी,
जिस तरह से सलमडाँग मिलेनियर की बुराई के रहे थे क्या पद्मश्री की आलोचना करने का साहस कर सकते है?

आलोक सिंह "साहिल" का कहना है कि -

ye wali dogli himmat sirf amar singh jaise vaishth logon ke bas ki hi bat hai.....amitabh ek buri tarah fail neta rahe hain.....
ALOK SINGH "SAHIL"

Anonymous का कहना है कि -

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