Tuesday, December 30, 2008

साहित्यकार राजेन्द्र यादव का कार्टून

हिन्द-युग्म के वार्षिकोत्सव जिसका आयोजन हिन्दी भवन में 28 दिसम्बर 2008 को हुआ, में कार्टूनिस्ट मनु बे-तख्खल्लुस भी उपस्थित थे। इन्होंने मुख्य-अतिथि देश के प्रख्यात साहित्यकार राजेन्द्र यादव के ऊपर एक कार्टून बनाया। आप भी देखें।

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17 बैठकबाजों का कहना है :

masijeevi का कहना है कि -

हा हा हा
सिगार में बड़ी आग है

संजय बेंगाणी का कहना है कि -

:)
सिगर मा इस्टाइल है. सिगार वाम शासीत क्यूबा में बनते है. ऐसे कई कारण हो सकते है.

Suresh Chiplunkar का कहना है कि -

बेहतरीन व्यंग्य… मान गये कार्टूनिस्ट जी को… जो बात दसियों ब्लॉगर सैकड़ों शब्दों में न कह पाये, इस एक चित्र और एक लाइन में बयाँ कर दिया… बहुत खूब…

COMMON MAN का कहना है कि -

bahut sundar kaartoon banaya hai.

तपन शर्मा का कहना है कि -

हा हा..
हँसे बिना नहीं रह पाया...

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) का कहना है कि -

सिर्फ़ हँसने की बात नही, क्यूँकी ये व्यंग राजेन्द्र जी पर नही लगता अपितु हमारी हिन्दी को नग्न करते हिन्दी के पैरोकार पर ज्यादा लगती है,
भाई को बधाई
राजेन्द्र जी हमारी हिन्दी शर्मिन्दा है आपसे.

Anil Pusadkar का कहना है कि -

सच मे सिगार मे बडी आग्

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

रात किसी ने सिगरेट पीकर,
शहर के चेहरे पर फूंकी थी,
सुबह से कोहरे में लिपटी है,
सारी दिल्ली....

Amit का कहना है कि -

हा हा हा ...मस्त कार्टून है ....बहुत सही

seema gupta का कहना है कि -

" ha ha ha great well said"

regards

Amit का कहना है कि -

bahut achhaa objarvation....

MUFLIS का कहना है कि -

andar ki aag to thandi parh chuki hai...ab to bs bnaavat ka hi aasraa hai...
dikhaava, bs be.dhangee dikhaava..
---MUFLIS---

प्रकाश बादल का कहना है कि -

वाह! मनु भाई,

कार्टून बेहद प्रभावशाली है। हिन्दी को अंग्रेज़ी स्टाईल धूंएं में तो न उड़ाईए। मनु भाई मुझे फिर एक बे मीटरी ग़ज़ल आ रही है। लेकिन मैं कहूंगा। आप कितना अच्छा कार्टून बना लेते हैं वाह!

ѕαηנαу ѕєη ѕαgαя का कहना है कि -

एक रात तेरी याद आई
तन्हाई मिटने मैंने सिगार जलाई !!
कमबख्त क़यामत तो तब हुई जब आग के ढूहे ने तेरी तस्बीर बनाई !!
काफी सुंदर कार्टून बनाया है !!!

--------------संजय सेन सागर

sumit का कहना है कि -

उन्होने सिगार पिया ये अच्छा नही लगा पर वो हमारे मुख्य अतिथि थे
उन पर हिन्द युग्म पर कार्टून बना देखना ज्यादा बुरा लग रहा है

neelam का कहना है कि -

अतिथि देवो भव की भावना ने चुपचाप बैठने को मजबूर किया था ,वरना
अब इन्हे कौन समझाए की हमारी हिन्दी ,हमारी
सांकृतिक धरोहर को अजायबघर में रखने वाले के साथ कैसा सलूक होना चाहिए |

sanskar sugandh का कहना है कि -

sigar]sigrate ho ya pipe log abhi bhi usi me atke hai usse jyada kya unka or koyi sani nahi

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