
भारतवर्ष एक ऐसा देश है जहाँ हर चीज का जुगाड़ है. कालेज में दाखिला हो, राजनीति में प्रवेश, रेल में सीट हो या फिर नौकरी हो हर जगह जुगाड़ चलता है. यही नही अब भगवान के दर्शन के लिये भी जुगाड़ चल गया है. यह रीति तो हमेशा से ही रही है कि नियम बनते ही उसका तोड़ ढ़ूँढ लिया जाता है. इसका एक ताजा उदाहरण समाचार पत्र में पढ़ा तो रहा नही गया. सोचा क्यो न औरों को भी अवगत करा दूँ ताकि अन्य भी इसका लाभ उठा सकें.
आइये मैं आपको तिरुपति बालाजी के दर्शन के लिये एक जुगाड़ बताती हूँ. जरा ध्यान से पढ़ियेगा. अगर आप तिरुपति बालाजी के दर्शन कम समय में करना चाहते हें तो एक बच्चा किराये पर लीजिये और आपको दर्शन फटाफट हो जायेंगे. अब आप सोचेंगे कि ये क्या बात हुई भला, तो मैं आपको समझाती हूँ. तिरुमुला तिरुपति देवस्थानम का मानना है कि जो महिलायें भीड़ में बच्चों को लेकर घंटों खड़ी रहती हैं उन्हें बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता है. अत:तिरुमुला तिरुपति देवस्थानम द्वारा महिलाओं को सुविधा प्रदान की गयी है. अब वो महिलायें लंबी लाइन में लगने के बजाय अलग से कम समय में दर्शन कर सकेंगी. क्योंकि उनके पति भी साथ होगें तो उन्हें भी इस सुविधा का लाभ मिलेगा. इसका मतलब यह हुआ कि शादीशुदा जोड़े के साथ अगर बच्चा है तो उन्हें इस सुविधा का लाभ मिलेगा.
यह पढ़कर शायद कुछ लोगों के मन में प्रश्न उठ रहा होगा, कि इसमें हमारा क्या फायदा ? हम तो शादीशुदा नही है या शादीशुदा हैं तो बच्चा नहीं है. यह जुगाड़ हमारे किस काम का ? अरे भई मैंने कहा न कि ध्यान से पूरा पढ़िये. अब आपके काम की बात. जैसे ही यह नियम बना तो नियम का तोड़ ढूँढने वालों ने एक जुगाड़ बना लिया है, वो ये कि जिनके पास बच्चा नहीं है वो लोग उन्हें किराये पर बच्चा देते हैं. बच्चे का किराया एक घंटे के लिये २०० रुपये है और अगर डिमान्ड ज्यादा है तो ५०० रुपये तक कीमत वसूली जाती है. अब कहिये है न काम की बात. जो लोग शादीशुदा नहीं है उन्हें थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा. या तो वो लोग शादी कर लें या फिर हो सकता है जल्द ही पति-पत्नी भी किराये पर मिलने लगे.
दीपाली पंत तिवारी 'दिशा'

मार्कण्डेय