
देश की अधिकांश जनता गांवों में बसती है और ऐसा प्रतीत होता है कि यूपीए सरकार ने अपनी दूसरी पारी में पहला बजट पूरी तरह से ग्रामीण जनता को समर्पित कर दिया है क्योंकि इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जारी लगभग सभी योजनाओं के लिए आंबटन में बढ़ोतरी की है।
श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि कृषि हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार रहा है। हमारी 60 प्रतिशत जनसंख्या इससे अपना आहार प्राप्त करती है। उन्होंने कहा कि 2008-09 में कृषि ऋण प्रवाह 2,87,000 करोड़ रुपए था जबकि 2009-10 के लिए लक्ष्य 3,25,000 करोड़ रुपए तय किया गया है। किसानों को ऋण 7 प्रतिशत की दर से दिया जाएगा और जो किसान अपने अल्पावधि ऋण का भुगतान समय पर कर देंगे, उन्हें एक प्रतिशत की दर से सहायता देगी।
वित्त मंत्री ने ग्रामीण जनता को लाभ पहुंचाने के लिए अपनी थैली खोल दी है।
उन्होंने कहा कि 2009-01 में राष्ट्रीय ग्रामीण मिशन के लिए 2057 करोड़ रुपए की वृद्वि की जाएगी। अंतरिम बजट में इस मद में 12,070 करोड़ रुपए का प्रावधान था। उन्होंने कहा कि इस योजना को गत वर्ष ही लागू किया गया है और इसके परिणाम अच्छे मिल रहे हैं।
अंतर
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर को कम करने के लिए वित्त मंत्री ने भारत निर्माण योजना के बजट में गत वर्ष की तुलना में 45 प्रतिशत अधिक आबंटन किया है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युत्तीकरण योजना के तहत 7,000 करोड़ रुपए का प्रस्ताव है। यह गत वर्ष के बजट अनुमानों की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत भी आबंटन की राशि बढ़ाई गई है।
ग्रामीण आवास निर्माण में गति लाने के लिए भी सरकार विशेष प्रयास कर रही है।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) के लिए सरकार ने आबंटन में जोरदार वृद्वि की है। वर्ष 2009-10 के लिए सरकार ने 39,100 करोड़ रुपए का आबंटन किया है जो गत वर्ष के बजट अनुमानों की तुलना में 144 प्रतिशत अधिक है। यह योजना 2006 में आरंभ की गई थी और इसे भारी सफलता मिली है।
आदर्श ग्राम
श्री मुखर्जी के अनुसार इस समय देश में लगभग 44,000 ऐसे गांव हैं जिनमें अनुसूचित जातियों की जनसंख्या 50 प्रतिशत से अधिक है। इन ग्रामों के विकास के लिए प्रधान मंत्री आदर्श योजना नामक एक नई योजना आरंभ की जा रही है।
अच्छी बात?
यह एक अच्छी बात है कि सरकार ने ग्रामीण विकास की ओर अधिक ध्यान दिया है और ऐसा करना भी चाहिए क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है।
लेकिन क्या यह पूरी राशि ग्रामीण जनता तक पहुंच पाएगी। उल्लेखनीय है कि एक बार स्वर्गीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया था कि सरकार जो फंड ग्रामीण जनता के लिए आबंटित करती है उसमें से लगभग 15 पैसे ही पहुंच पाते हैं। बाकी रकम कहां जाती है यह किसी से छुपा नहीं है।
कुछ समय पूर्व यही बात उनके सुपुत्र और युवा नेता श्री राहुल गांधी ने भी कही थी।
ऐसे में प्रश्न फिर यही उठता है कि इस बात की क्या गारंटी है कि यह पूरी रकम जनता तक पहुंच पाएगी। बेहतर होता कि प्रणब दा इस बात की भी कोई ठोस व्यवस्था करते।
--राजेश शर्मा

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