Wednesday, February 11, 2009

हमारे आधुनिक जंगल मुंबई में आपका "हार्दिक" स्वागत है....

डिस्कवरी चैनल पर बेहद चर्चित कार्यक्रम है “MAN Vs WILD”….बियर ग्रिल्स इस शो को प्रस्तुत करते हैं....बियर इस शो में कई हैरतअंगेज़ कारनामे करते हैं......चैनल के हर एपिसोड में वो कभी बीहड़ जंगल में, किसी टापू पर, उजा़ड़ रेगिस्तान, पहाड़ों, समंदर या किसी भी ऐसी ही सुनसान जगह पर पाये जाते हैं....और फिर, उस पूरे एपिसोड के दौरान वो ऐसी कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने की अजीब तरक़ीब दिखाते हैं.....कभी किसी जंतु का कच्चा मांस खाते हैं तो कभी मल-मूत्र तक ही पी जाते हैं..फिर बताते भी हैं कि इन पदार्थों में कई तरह के प्रोटीन व पोषक तत्व पाये जाते हैं जो बहुत ही लाभप्रद हैं.....अब जबकि जंगल, पहाड़, रेगिस्तान आदि घटते जा रहे हैं (ये भी मंदी का असर कहा जा सकता है) तो बियर भाई के पास भी ऐसे बीहड़ प्रदेशों के लाले पड़ जायेंगे.....तो हार्दिक मेहता ने सोचा कि डिस्कवरी का थोड़ा भला किया जाए और उन्हें इस शो को जारी रखने के नये तरीके सुझाए जाए....बियर भाई को मिली ये मुफ्त की सलाह बैठक पर हाज़िर है....

प्रिय बियर,
अगर आपको लगता है कि सुनसान रेगिस्तान और बीहड़ जंगल सिर्फ़ प्रकृति की गोद में ही उपलब्ध हैं, तो दोबारा सोचिए....हम भी एक जंगल में रहते हैं जिसका नाम है मुंबई.....यहां हर तरह की प्रजातियां उपलब्ध हैं....अगर आप यहां अकेले छोड़ दिये गये तो मैं शर्तिया कहता हूं कि कई एपिसोड तक आप मुंबई छोड़ नहीं पायेंगे....न शारीरिक तौर पर और न दिमाग़ी तौर पर....दरअसल, ये शहर आपसे कभी बाहर नहीं आ पायेगा.....आप जैसे विदेशी भाई इसे मायाजाल कहते हैं...हम अंग्रेज़ी सीखकर इसे “मैट्रिक्स” कहते हैं....ख़ैर, मुद्दे से भटक रहा हूं....मैं आपको दस चुनौती भरी परिस्थितियां देता हूं, आप कैसे इनसे निबटते हैं, आपका सिरदर्द है....लेकिन, इतना ज़रूर है कि अगर ये दस उलझनें आपने दूर कर दीं तो समझिए ये मुंबई की मिडिल क्लास के लिए वरदान साबित होगा....ये भी बता दूं कि हमारी मिडिल क्लास इतनी बड़ी है कि आप जिस शहर में रहते हैं, वैसे कई शहर इनके लिए कम पड़ जायेंगे.....तो, दस करोड़ (लोगों) के लिए ये रहे दस सवाल....आपका समय शुरू होता है अब.....

1) मान लें कि आप उत्तरी मुंबई में रहते हैं.... अगर आप ठीक 6 बजे सुबह नहीं उठते हैं तो मुंबई के दक्षिणी कोने में ठीक 9:30 बजे अपने ऑफिस कैसे पहुंच पायेंगे ???.....(नहले पे दहला : 6:10 मिनट पर भी उठकर ये सोचना आपकी सबसे बड़ी भूल होगी..)
2) अगर आज संडे नहीं है तो चर्चगेट की एक फास्ट लोकल ट्रेन में सुबह के आठ से 11 बजे और शाम पौने सात से साढे दस के बीच औप कैसे घुसेंगे?? (सोचिए, सोचिए..... ट्रेन पर छत तो तो है मगर ये ट्रेन बिहार नहीं जाती !!!.....)
3) सड़क के दोनों तरफ़ वन-वे ट्रैफ़िक है.....दिन के चौबीसों घंटे में कभी भी चकाला पेट्रोल पंप से आप ट्रैफिक से बच कर कैसे निकल सकते हैं.....?? (आप चाहें तो अपनी लोकेशन 7 बंग्ले से अंधेरी जाने वाले रास्ते को भी चुन सकते हैं...)
4) मान लें कि मुंबई के किसी भी स्थान पर आप पहुंचे हैं और किसी मुंबई वाले से बात कर रहे हैं या किसी दीवार से सटकर खड़े हैं.........लाख चाहकर भी उस “चमत्कारी पीक/थूक” से बचकर दिखाएं जो उनके मुंह से स्वाभाविक निकलती है या फिर दीवारों पर पायी जाती है.....
5) बियर भाई, ये बताएं कि मुंबई में कहीं भी किसी डर्टी इंडियन की कमीज़ से आ रही निरंतर दुर्गंध से बचने का कोई उपाय है आपके पास ?? (चाहें आप दो सेकेंड के लिए ही क्यों न खड़े हो जायें....)
6) अगर मुंबई के ऑटोचालक हड़ताल पर हों तो घर से बाहर कैसे निकल पायेंगे...(बताइए, बताइए...)
7) मान लें कि आप हिंदी सीख जाते हैं या फ़िर मराठी.....फिर, एक अधेड़ उम्र के मराठी से हिंदी में बात कर के देख लें, फिर बताएं कि “सेना” की कार्रवाई से कैसे बच पायेंगे....
8) हफ्ते के किसी भी दिन मुंबई में छुट्टियां मनाने के लिए एक “एकांत” स्थल ढूंढकर दिखा दीजिए ?? (आप मुंबई के आस-पास की 100 मील तक मगजमारी कर सकते हैं...)
9) मंदी के इस दौर में एक नौकरी ढूंढ कर दिखाएं.....(डिस्कवरी चैनल में सैलेरी तो टाइम से मिल रही है ना.....)
10) आप अलग-अलग जगहों पर घूमते हैं, बिल्कुल अकेले......ज़रा मुंबई के किसी इलाके में, खासकर किसी ऐसे रेलवे स्टेशन पर जाकर दिखाएं जहां कोई लावारिस लाश न पड़ी हो.....

बियर भाई....ये स्लमडॉग के फिल्मी सवाल नहीं है...ये हमारा सबसे आधुनिक जंगल है.....अद्भुत, अद्वितीय....आपका स्वागत है यहां....यहां हर किसी के लिए जगह है, कभी भी, कहीं भी.......

हार्दिक मेहता

हिंदी में अनुवाद : निखिल आनंद गिरि

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4 बैठकबाजों का कहना है :

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

हा हा हा !!!
अच्छा व्यंग है |
मेरी हंसी हम पर और इन परिस्थितियों पर है |
मैं तो मुम्बई में जन्म से लेकर आज तक रहता हूँ और यदि ऐसी बातों को बाटना चाहू तो इससे भी बड़ा लेख होगा |
जीवन की गुणवत्ता ( Quality of life ) बुरी हो गयी है |

आपके इस लेख के लिए धन्यवाद |

अवनीश तिवारी

तपन शर्मा का कहना है कि -

दिल्ली मुम्बई बहन बहन .. :-)
लेकिन मुम्बई दिल्ली की बड़ी बहन है..!!!

Tarkeshwar Giri का कहना है कि -

very nice

आलोक सिंह "साहिल" का कहना है कि -

bahut hi achha vyangya hai....
ALOK SINGH ""SAHIL

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