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Saturday, July 17, 2010

बड़े बेआबरू होकर लौट आए विदेश मंत्री

पाकिस्तान से बेआबरू होकर लौटे हमारे विदेश मंत्री की मुस्कुराहट पर बहुत कुछ लिखने का मन था, मगर फिलहाल बीबीसी पर ये लेख पड़ा मिला तो सोचा बैठक पर इसी से शुरुआत की जाए....

कौन माई का लाल कहता है कि एसएम कृष्णा और शाह महमूद क़ुरैशी का वार्तालाप सफल नहीं रहा. पहली बार ऐसा हुआ कि एसएम कृष्णा इस्लामाबाद के बेनज़ीर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे तो उन के स्वागत के लिए नया क़ालीन बिछाया गया.
दोनों विदेश मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि डिनर में जो खाने परोसे गए वह स्वादिष्ट थे और इसी तरह से खानों से दोनों देशों के बीच विश्वास और बढ़ेगा.
जिस गाड़ी में शाह महमूद क़ुरैशी और एसएम कृष्णा राष्ट्रपति ज़रदारी और प्रधानमंत्री गिलानी से मिलने गए उस गाड़ी के एसी की ठंडक की मेहमान विदेश मंत्री ने प्रशंसा की और प्रस्ताव दिया कि इस तरह से एसी बनाने वाली फैकट्री में साझा निवेश में भारत और पाकिस्तान के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ावा मिल सकता है.
शाह महमूद क़ुरैशी ने श्री कृष्णा की भावनाओं की प्रशंसा करते हुए प्रस्ताव दिया कि इस परियोजना के लिए एमओयू की स्क्रिप्ट को अगली मुलाक़ात में डिस्कस किया जा सकता है.
जब दोनों विदेश मंत्री संयुक्त प्रेस कांफ़्रेस करने के लिए पाँच घंटे पत्रकारों को इंतिज़ार कराने के बाद मुस्कराते हुए हॉल में पहुँचे तो एक कर्मचारी ने मुझे एक कोने में ले जा कर बताया कि कृष्णा-क़ुरैशी बातचीत इसलिए लंबी हो गई क्योंकि इस में बहुत सा एजेंडा कवर किया गया.
मसलन जिस मेज़ के इर्द गिर्द दोनों प्रतिनिधिमंडल बैठे उस की बनावट विस्तार से डिस्कस की गई. कृष्णा जी यह भी जानना चाहते थे कि क़ुरैशी साहब चाय में दो चम्मच चीनी किस लिए डालते हैं.
उस अवसर पर क़ुरैशी साहब ने यह प्रस्ताव दिया कि अगली बार जब भी भारत और पाकिस्तान के डेलीगेशन मिलेंगे तो दोनों डेलीगेशन के लोग बग़ैर चीनी के चाय पिएँगे ताकि दक्षिण एशिया से ग़रीबी के ख़ात्मे के लिए ग़ैर-ज़रूरी ख़र्चों में कमी की शुरुआत हो सके.
मैंने उस कर्मचारी से कहा कि मगर हम तो समझ रहे थे कि मुंबई, कश्मीर, आतंकवाद, अफग़ानिस्तान, सियाचिन, सर क्रीक, न्यूक्लियर...... उस कर्मचारी ने मेरी बात काटते हुए कहा, ओहो... आप पत्रकार लोग जब भी सोचेंगे बुरा ही सोचेंगे... अरे भाई यह कोई डिस्कस करने की बातें हैं. हज़ार बार तो इन विषयों पर बात हो चुकी है. इंडिया को इस बारे में पाकिस्तान का पक्ष मालूम है और पाकिस्तान को इंडिया का. तो फिर समय बरबाद करने का क्या मतलब? भला डेडलॉक तोड़ने का इस से अच्छा एजेंडा और क्या हो सकता था जो कृष्णा क़ुरैशी ने डिस्कस किया.....
हाँ, तो मैं आप को बता रहा था कि दोनों शिष्टमंडलों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि सांस्कृतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अगली समग्र वार्ता में रवि शंकर और मेंहदी हसन को भी शामिल किया जाए.... और राग बागेश्वरी और झंजोटी को आम करने के लिए दोनों देशों.....

(माफी चाहता हूँ मैं उस कर्मचारी की पूरी बात नहीं सुन सका क्योंकि प्रेस कॉंफ़्रेंस ख़त्म होने से पहले ही मीडिया चाय की मेज़ की तरफ लपक चुका था. और दोनों विदेश मंत्रियों के चेहरे फ्लैश गनों की लपक झपक में टिमटिमा रहे थे.)..

वुसतुल्लाह खान
(बीबीसी ब्लॉग से साभार)